विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस : उम्र बढ़ने के साथ ही बुजुर्गो में बढ़ रहा बीमारियों का खतरा, महिलाओं और पुरुषों में अलग-अलग हैं स्वास्थ्य चुनौतियां
जयपुर के अस्पतालों में चालीस फीसदी से ज्यादा मरीज 60 की उम्र के पार
जयपुर। उम्र बढ़ना जीवन का स्वाभाविक पड़ाव है लेकिन 60 वर्ष के बाद शरीर में होने वाले हार्मोनल, हड्डियों, मांसपेशियों और प्रतिरोधक क्षमता से जुड़े बदलाव कई बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। बुजुर्गों में एक साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए नियमित जांच, संतुलित खान-पान, शारीरिक सक्रियता और समय पर इलाज बेहद जरूरी है। एसएमएस सहित शहर के कई अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों में करीब 40 फीसदी मरीज 60 वर्ष या उसके पार वाली उम्र के हैं। इनमें महिला और पुरुष दोनों में अलग अलग बीमारियों की समस्या सामने आ रही है। ऐसे में राज्य सरकार और विशेषकर सवाईमानसिंह अस्पताल में बुजुर्गों के लिए मुफ्त जांचें, दवा और विशेषकर अलग लाइनों की व्यवस्था की गई है। जिससे उन्हें राहत मिल रही है।
मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने से महिलाओं में हड्डियों का घनत्व तेजी से घट सकता है। इससे कमर, कूल्हे और कलाई में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता है। कैल्शियम-विटामिन डी युक्त आहार, नियमित वजन उठाने वाली हल्की एक्सरसाइज और डॉक्टर की सलाह से जांच व उपचार मददगार हैं। उम्र के साथ महिलाओं में भी हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ता है। सीने में दर्द, सांस फूलना, अचानक कमजोरी या बोलने में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बढ़ती उम्र में डायबिटीज और थायरॉइड संबंधी समस्याएं आम हैं। बार-बार पेशाब आना, पेशाब रोक न पाना और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की समस्या बढ़ सकती है। असामान्य योनि रक्तस्राव या लगातार दर्द होने पर तत्काल स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
बुजुर्ग पुरुषों में प्रमुख बीमारियां: उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट का आकार बढ़ना आम है। बार-बार पेशाब लगना, रात में कई बार उठना, पेशाब शुरू करने में कठिनाई या धार कमजोर होना इसके संकेत हो सकते हैं। जांच के बाद दवा या आवश्यकता होने पर अन्य उपचार किया जाता है। पुरुषों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। धूम्रपान, मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल और शारीरिक निष्क्रियता जोखिम को और बढ़ाते हैं।
मधुमेह और किडनी रोग :
लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज और ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ब्लड शुगर, क्रिएटिनिन और यूरिन जांच डॉक्टर की सलाह के अनुसार करानी चाहिए।
यौन एवं हार्मोन संबंधी बदलाव :
उम्र के साथ टेस्टोस्टेरोन में कमी और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इन्हें उम्र का अनिवार्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
दोनों में आम बीमारियां :
महिला और पुरुष दोनों में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, ह्दय रोग, स्ट्रोक, गठिया, आंखों की कमजोरी, सुनने की समस्या, कब्ज, नींद की परेशानी, डिमेंशिया, अवसाद और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। गिरना और फ्रैक्चर भी बुजुर्गों के लिए बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है।
इन बातों पर ध्यान दें बुजुर्ग :
साल में कम से कम एक बार सामान्य स्वास्थ्य जांच कराएं।
ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और वजन पर नजर रखें।
डॉक्टर की सलाह से आंखों, दांतों, सुनने और हड्डियों की जांच कराएं।
रोजाना उम्र और क्षमता के अनुसार पैदल चलना और हल्का व्यायाम करें।
पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर, फल सब्जियां और कैल्शियम युक्त भोजन लें।
धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी रखें।
पर्याप्त नींद और सामाजिक सक्रियता बनाए रखें।

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