जोजरी प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत अनुपालन की जिम्मेदारी
20 लाख लोगों के जीवन से जुड़ा है मामला
जोधपुर। जोजरी नदी में प्रदूषण और इससे प्रभावित करीब 20 लाख लोगों के जीवन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई अहम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को आदेशों की समयबद्ध और प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही अगली सुनवाई पर 4 अगस्त को मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विक्रमनाथ व जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में जल स्रोतों में औद्योगिक प्रदूषण से जुड़ी सामने आ रही घटनाएं बेहद गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय हैं। कोर्ट के समक्ष रखी गई मीडिया रिपोर्ट्स में जोजरी नदी के पास तनावड़ा क्षेत्र में एक तालाब का पानी गुलाबी होने और मानव एवं पशुओं के उपयोग के लिए अनुपयुक्त होने का उल्लेख किया गया। कोर्ट ने माना कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो इसका असर भूजल, कृषि भूमि, वन्यजीव और जनस्वास्थ्य पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। हाई लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट में जोधपुर के मेलबा, धवा, झंवर और लूणी तहसील के आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीवों पर प्रदूषण के प्रभाव का भी उल्लेख किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार धावा और डोली क्षेत्र चिंकारा, काला हिरण, लोमड़ी और नीलगाय सहित कई वन्यजीव प्रजातियों का महत्वपूर्ण आवास हैं। स्थानीय लोगों ने कमेटी को बताया कि जोजरी नदी में प्रदूषित पानी के प्रवाह के कारण वन्यजीवों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। कमेटी ने जोधपुर जिले के मेलबा और मोडाथली क्षेत्र की कुछ भूमि को वन विभाग को हस्तांतरित कर वन एवं घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने की सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को इन जमीनों के हस्तांतरण के लिए आवश्यक अधिसूचनाएं और आदेश शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सांगारिया स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) में जमा औद्योगिक अपशिष्टयुक्त पानी को लेकर भी सख्ती दिखाई। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल को तकनीकी कार्ययोजना तैयार कर जमा पानी का सुरक्षित उपचार और निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पूरी प्रक्रिया कमेटी की प्रत्यक्ष निगरानी में होगी और उपचार से पहले तथा बाद में वैज्ञानिक जांच कर यह सुनिश्चित करना होगा कि जहरीले तत्व समाप्त हो चुके हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया की आड़ में बंद औद्योगिक इकाइयों को दोबारा शुरू नहीं किया जा सकेगा।

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