SSLV के पहले चरण के बेहतर संस्करण का सफल परीक्षण, 600 से अधिक अलग-अलग मानकों की जांच : ISRO

पहले चरण में किए गए सुधारों को मंजूरी

SSLV के पहले चरण के बेहतर संस्करण का सफल परीक्षण,  600 से अधिक अलग-अलग मानकों की जांच  : ISRO
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने श्रीहरिकोटा में छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के पहले चरण (एसएस1) के उन्नत संस्करण का सफल जमीनी परीक्षण पूरा कर लिया है। इस सुधार से रॉकेट की क्षमता में लगभग 100 किलोग्राम अतिरिक्त पेलोड ले जाने की बढ़ोतरी होगी।

चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने वाले रॉकेट एसएसएलवी के पहले चरण के बेहतर संस्करण का जमीनी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसरो के अनुसार, यह परीक्षण 11 अगस्त को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में किया गया। परीक्षण के दौरान रॉकेट के पहले चरण में इस्तेमाल होने वाली ठोस मोटर को जमीन पर चलाकर उसके प्रदर्शन की जांच की गयी।

एसएसएलवी के पहले चरण एसएस1 में कई सुधार किए गए हैं। इनमें मोटर के दो हिस्सों में ईंधन के जलने की गति बढ़ाना, गर्मी से बचाने वाली सुरक्षा प्रणाली में सुधार और नोजल की निर्माण प्रक्रिया को आसान बनाना शामिल है। इसके साथ ही मोटर का वजन भी कम किया गया है। इसरो ने बताया कि परीक्षण के दौरान 600 से अधिक अलग-अलग मानकों की जांच की गयी। इनमें मोटर के शुरू होने, ईंधन के जलने, उसकी मजबूती, तापमान, कंपन और आवाज से जुड़े पहलू शामिल थे।

परीक्षण से मिले आंकड़ों के अनुसार मोटर का प्रदर्शन इसरो के अनुमान के काफी करीब रहा। इस परीक्षण के सफल होने के साथ एसएसएलवी के पहले चरण में किए गए सुधारों को मंजूरी मिल गयी है। इसरो के मुताबिक, बेहतर एसएस1 को एसएसएलवी में शामिल किए जाने के बाद यह रॉकेट पृथ्वी की निचली कक्षा में करीब 100 किलोग्राम अधिक वजन के उपग्रह ले जा सकेगा। एसएसएलवी को इसरो ने छोटे उपग्रहों को कम समय में और जरूरत के मुताबिक अंतरिक्ष में भेजने के लिए विकसित किया है। यह रॉकेट दो सफल विकासात्मक उड़ानें पूरी कर चुका है।

इसरो ने एसएसएलवी की तकनीक भारतीय कंपनियों को देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके तहत भविष्य में एसएसएलवी का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाएगा और छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने की सेवाएं उपलब्ध करायी जाएंगी। इसरो इस वर्ष के अंत में तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम स्थित देश के दूसरे और नये अंतरिक्ष केंद्र से पहला एसएसएलवी मिशन प्रक्षेपित करने की योजना बना रहा है। यह अंतरिक्ष केंद्र मुख्य रूप से एसएसएलवी मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

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