48 घंटे के अंदर दो गर्भवती महिलाओं की सांसें थमी, रेफरल व्यवस्था पर उठे सवाल
सांस लेने में परेशानी के साथ थूक में खून आने की शिकायत
जोधपुर। संभाग के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र मथुरादास माथुर अस्पताल में पिछले 48 घंटे में दो गर्भवती महिलाओं की मौत ने एक बार फिर गंभीर गर्भावस्था के मामलों में समय पर इलाज और रेफरल व्यवस्था की चुनौती को सामने ला दिया है। दोनों महिलाएं पाली जिले से गंभीर हालत में जोधपुर भेजी गई थीं। यहां पहुंचने तक उनकी स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी। पाली से रेफर होकर आई चिड़िया पांच माह की गर्भवती थी। उसे सांस लेने में परेशानी के साथ थूक में खून आने की शिकायत थी।
एमडीएम अस्पताल में जांच के बाद पता चला कि उसके फेफड़ों में ट्यूमर था। तमाम प्रयासों के बावजूद 27 जुलाई की रात उसकी मौत हो गई। दूसरी महिला फैंसी नौ माह की गर्भवती थी। पाली से रेफर होकर आई इस महिला की हालत भी गंभीर थी। चिकित्सकों के अनुसार गर्भ में बच्चे की धड़कन नहीं मिल रही थी और बच्चे की गर्भ में ही मौत हो चुकी थी। महिला पीलिया से पीड़ित थी और उसे काफी रक्तस्राव हो रहा था। इलाज के दौरान उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। खून और प्लाज्मा चढ़ाने के बाद भी 28 जुलाई देर रात उसकी हालत नहीं संभल सकी।
नौ दिन में 4 मौतें, हर मामला रेफरल मरीजों से जुड़ा
जोधपुर में पिछले नौ दिनों में गर्भवती और प्रसूताओं की मौत के चार मामले सामने आ चुके हैं। खास बात यह है कि सभी महिलाएं दूसरे जिलों से गंभीर हालत में रेफर होकर आई थीं। इनमें तीन मौतें मथुरादास माथुर अस्पताल और एक मौत महात्मा गांधी अस्पताल में हुई है। वहीं बाड़मेर से आई एक प्रसूता अभी वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही है। चिकित्सकों के मुताबिक उसे जोधपुर लाते समय हीमोग्लोबिन केवल ढाई ग्राम था।

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