एआई और इंटरनेट दो धारी तलवार
जानकारी के लिए तो सही लेकिन बीमारी का इलाज डॉक्टर को ही करने दें
कोटा। दैनिक नवज्योति द्वारा आयोजित मासिक परिचर्चा की श्रंखला में गुरूवार को एआई व इन्टरनेट स्वास्थ्य संबंधी जानकारी समझने के लिए बहुत उपयोगी हो सकते हैं लेकिन इलाज तय करने के लिए उस पर कितना निर्भर हो सकते हैं ( हाउ मच टू रिलाई ओन इंटरनेट एन्ड एआई फॉर ट्रीटमेंट आफ एनी एइलमेंट) विषय पर आयोजित किया गया। इसमें गवर्नमेंट कॉलेज के् डाक्टर्स,आयुर्वेद, होम्योपैथ,वकील टेक्नोलॉजी से जुडे विशेषज्ञों ने भाग लिया। परिचर्चा में कहा गया कि इलाज तय करने के लिए केवल इंटरनेट या एआई पर पूरी तरह निर्भर होना उचित नहीं है। आॅनलाइन उपलब्ध जानकारी सामान्य होती है, जबकि हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, चिकित्सा इतिहास और लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। कई बार इंटरनेट पर अधूरी, पुरानी या भ्रामक जानकारी भी मिल सकती है, जिससे अनावश्यक चिंता बढ़ सकती है। डॉक्टर की शारीरिक जांच, परीक्षणों और चिकित्सकीय अनुभव का विकल्प नहीं है। इसलिए इंटरनेट और एआई को स्वास्थ्य जागरूकता तथा प्रारंभिक जानकारी के साधन के रूप में उपयोग करना चाहिए, जबकि सही निदान और उपचार के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।
प्रस्तुत है टॉक शो के अंश...
AI
- केवल दी गई जानकारी के आधार पर जवाब देता है।
- इनकी प्रत्यक्ष जांच नहीं कर सकता।
- केवल लिखे या बताए गए लक्षणों को समझता है।
- उपलब्ध डेटा और पैटर्न के आधार पर सुझाव देता है।
- रिपोर्टों का सामान्य विश्लेषण कर सकता है।
- उपचार लागू नहीं कर सकता।
Doctor
- मरीज की शारीरिक जांच कर सकता है।
- नाड़ी, रक्तचाप, तापमान आदि स्वयं माप सकता है।
- चेहरे के भाव, चलने-फिरने और व्यवहार का अवलोकन कर सकता है।
- मेडिकल इतिहास और वर्तमान स्थिति को जोड़कर निर्णय लेता है।
- जांच रिपोर्टों की व्यावहारिक व्याख्या कर सकता है।
- आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपचार शुरू कर सकता है।
एआई सहयोगी, पर टच थैरेपी जरूरी
समाज में जिस तरह का परिवर्तन हो रहा है। डॉक्टर भी उसी के अनुरूप स्वयं को ढाल रहे हैं। एआई के इस युग में जिस तरह की गम्भीर बीमारियां हो रही हैं उनका सही इलाज करने के लिए मशीनों का उपयोग जांच में किया जा रहा है। लेकिन एआई का मतलब कृत्रिम बुद्धिमता है उसे इंसान ने ही बनाया है। ऐसे में यह बीमारियों की जानकारी के लिए सहयोगी तो हो सकता है लेकिन डॉक्टर नहीं बन सकता। बीमारी का सही इलाज तो डॉक्टर मरीज व उनके लक्षण को देखकर ही कर सकते हैं। बीमारी के इलाज में यदि हर कोई व्यक्ति एआई का उपयोग करने लगेगा तो उसे लाभ होने की जगह नुकसान होने की संभावना अधिक है। अमेरिका में बिना डॉक्टर के इलाज के दवाई नहीं मिलती। जबकि भारत में हर कोई एआई व गूगल से पूछकर ही स्वयं बीमारियों का उपचार मेडिकल से दवाईयां लाकर कर रहे हैं। यह मरीज के लिए हानिकारक हो सकता है।
- डॉ. एस.एन. गौतम, वरिष्ठ न्यूरो सर्जन गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज कोटा
एआई जिसके लिए बना है वही करे उपयोग
बदलते समय के साथ ही जिस तरह से तकनीकी युग आया है। उसमें इससे दूर नहीं रहा जा सकता। तकनीक व एआई का उपयोग जानकारी के लिए किया जाना तो अच्छा है। लेकिन इसका उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में हर किसी के द्वारा किया जाना सही नहीं है। एआई जिसके लिए बना है यदि वही इसका उपयोग करेंगे तो उसका लाभ होगा। लेकिन गलत व्यक्ति द्वारा उसका उपयोग करने पर उससे नुकसान ही होगा। मसलन परमाणु सही हाथ में होता है तो उर्जा उत्पन्न करता है। गलत हाथों में वही विस्फोट भी करता है। अर्थात एआई का भी सही जगह पर उपयोग होना ठीक है। कई मरीज डॉक्टर के पास आने से पहले ही एआई से पूरी जानकारी लेकर आते हैं। ऐसे में उन्हें बीमारी के बारे में समझाना मुुश्किल होता है। कई बार वह समझने को तैयार नहीं होत। एआई जानकारी के लिए तो सही है लेकिन चिकित्सा के क्षेत्र में बीमारी के इलाज में डॉक्टर ही सही सलाह दे सकते हैं।
-डॉ. नीलेश जैन, प्राचार्य गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज कोटा
एआई पर नेगेटिव कंटेंट ज्यादा आते है
मैं कोरोल पार्क में मेडिकल स्टोर का संचालन करती हूं। मेरे पास बहुत सी बार नीट के विद्यार्थी आते और बताते हैं कि हमे नींद नहीं आ रही है, गोली दे दो, स्टूडेंट उसके बारे में एआई पर सर्च करके खुद ही बोलते है कि यह गोली ही दो, हम बहुुत सी बार उनको समझाते है। लेकिन नहीं मानते है और एआई के हिसाब से वहां पढ़ाई के दौरान खुद ही इलाज के बारे में एआई से सलाह ले लेते है। एआई पर नेगेटिव कंटेंट ज्यादा आते हैं। मेरा मानना है कि एआई डॉक्टर और मरीज के बीच रिश्ता खत्म करने का काम कर रहा हैं।
-सीमा प्रजापति, मेडिकल स्टोर संचालिका जिला अध्यक्ष मानवाधिकार सहयोग संगठन
स्वास्थ्य के लिए एआई ठीक नहीं है
स्वास्थ्य के लिए एआई ठीक नहीं हैं। कई बार मरीज बिना डॉक्टर से परामर्श लिए गोलियां खा लेता है जिससे उनकी किडनी खराब होने की संभावना बनी रहती है। आमतौर पर देखा जाएं तो 60 साल के बाद इंसान में विभिन्न प्रकार के शारीरिक बदलाव आते है जिसमें कम सुनना, बार-बार किसी बात को बोलना, कम दिखाई देना सहित अन्य बदलाव उसमें आते हैं। इस बारे में यदि आप एआई पर देखेंगे तो आपको विभिन्न प्रकार की बीमारी एआई दिखा देगा। पर ये लक्षण हर व्यक्ति में होते हैं, आयुर्वेद में भी साइट इफैक्ट होते हैं। आयुर्वेद में हर बीमारी व इंसान के हिसाब से दवाई निर्धारित की जाती हैं। जो कि एआई नहीं कर सकता हैं। हमारे पास सर्जरी,मेडिसन सहित अन्य के विद्यार्थी आते है जो कि एआई से जानकारी लेकर आते हैं पर उनको ये भी पता नहीं होता है कि इनका उपयोग कैसे करना हैं। रोगी को डॉक्टर से ही इलाज लेना चाहिए।
- वैध नित्यानंद शर्मा, प्राचार्य राजकीय आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय
डाक्टर्स की कमी भी बड़ा कारण
मेरा मानना है कि जब डॉक्टर के पास मरीज देखने का लोड़ अधिक होगा। तब मरीज एआई का उपयोग करता हैं। और जब डॉक्टर पेशेंट के सवाल का जवाब नहीं दे पाता है तो मरीज एआई से बीमारी का समाधान सर्च करता है। एआई से यदि आप बीमारी के बारे में पूछते है तो वहां गलत जानकारी भी हो सकती है। एआई एल्गोरिदम से चलता है। मरीज बार-बार एआई से पूछता है तो वहां कुछ भी बता सकता हैं। एआई पर नेगेटिव कंटेंट ज्यादा वायरल होते हैं। एआई पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए।
- तरनदीप कौर, कॉ फाउंडर एन्ड सीईओ आइक्रा, आई स्टार्टअप
जानकारी ले सकते हैं उपचार नहीं
एआई व गूगल के जमाने में आज हर व्यक्ति डॉक्टर बन रहा है। छोटी हो या बड़ी बीमारी होने पर खुद ही इन तकनीक का उपयोग कर इलाज व दवाई तलाश कर रहे हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाईयां भी ले रहे हैं। जबकि एक दवाई का असर हर बीमारी में ऐसा जैसा नहीं हो सकता। हर व्यक्ति एआई का उपयोग कर स्यवं ही विशेषज्ञ बन रहा है। एआई पर एलोपैथी से होम्योपैथी व आयुर्वेदिक की जानकारी अधिक मिल रही है। इसमें कोई भी कुछ भी तथ्य डाल रहा है। इसमें साइड इफेक्ट की संभावना कम है। जबकि डॉक्टर टच थैरेपी से मरीज का सही इलाज कर सकते हैं। एआई जानकारी दे सकता है सही इलाज नहीं कर सकता।
-महेश शारदा, इंजीनियर शारदा मेडिकल स्टोर
सोशल मीडिया के नुकसान भी और फायदे भी , सब बाजार का खेल
एआई से स्वास्थ्य संबंधित प्रश्न पूछ सकते है पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। देखा जाए तो 2008 में एक साथ तीन चीजे बाजार में लॉंच हुई थी जिसमें बिटकॉइन सहित अन्य थी। एआई अभी मार्केट में आया है और इसको डवलप किया जा रहा हैं। जैसे की एक बार आप सोशल मीडिया पर किसी चीज के बारे में सर्च करेंगे तो आपको एफबी, इंस्ट्राग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया पर वे विज्ञापन दिनभर आते रहेंगे। बहुत सी बार हम एआई पर हम स्वास्थ्य संबंधित रिपोर्ट डालकर पूछते है तो वहां हमें जानकारी देता हैं। इसी तरह से हम अपनी जानकारी धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर शेयर करते जाते हैं। जिससे हमारी जानकारी हम सोशल मीडिया पर परोस रहे हैं। पहले तो एफबी सहित अन्य सोशल मीडिया व रील से पता चलता था। पर अब एआई से पता चल रहा है कि अब किस के घर में क्या हो रहा हैं। मेरा मानना है कि टीनऐजर के लिए सोशल मीडिया ब्लॉक करना चाहिए।
- संजय कुमार विजय,एडवोकेट व स्कूल डायरेक्टर
बिना जानकारी स्वास्थ्य पर एआई का उपयोग हानिकारक
परिवर्तन समाज का नियम है। पिछले कुछ समय में तकनीक के क्षेत्र में काफी तेजी से परिवर्तन हुआ है। इस परिवर्तन में तकनीक जिसके लिए बनी है वही इसका उपयोग करे तो लाभ होगा। एआई का उपयोग करके ही कृषि के क्षेत्र में कई नवाचार किए हैं। एआई का उपयोग अलग-अलग कई क्षेत्रों में तो किया जा सकता है। लेकिन स्वास्थ्य पर इसका उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह से करना गलत है। एआई बीमारी के उपचार में उतनी सही जानकारी नहीं दे सकता जितनी एक डॉक्टर मरीज को देखकर दे सकते हैं। इसलिए इलाज में तो एआई का उपयोग करना गलत होगा।
- आर्यन सिंह, एआई एन्ड स्मार्ट टेक्नॉलॉजी विशेषज्ञ
इंटरनेट बुरा नहीं बस उपयोग कितना और कैसे करें
मेरे नजरिया से एआई बुरा नहीं है। यह हमनें कई तरह की जानकारी देता है। हमें प्रारंभिक सूचना और जानकारी मुहैया कराता है। लेकिन मामला निर्भरता का है। विश्वास करने का है। कई बार तकनीक पर निर्भरता रोग के लेवल तक पहुंच जाती है। एआई कीवर्ड के हिसाब से सूचना देता है। सूचना लेने या जानकारी के बाद डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए। घर पर आॅक्सीमीटर से यदि आप प्लस नाप लें और ब्लड़ की आॅक्सीजन का पता लगा ले पर अंत में डॉ. से जरूर सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की तरह एआई इलाज नहीं कर सकता हैं। मात्र आपके कीवर्ड से आपको सलाह दे सकता है।
-जनार्दन राय, रिटायर्ड कमांडेंट बीएसएफ
गूगल व एआई का खिलाड़ी अधिक कर रहे उपयोग
एआई व गूगल का उपयोग आज हर क्षेत्र में जानकारी के लिए तो किया ही जा रहा है। अब तो लोग इससे अपनी बीमारियों का भी इलाज करने लगे हैं। खिलाड़ी चाहे वह किसी भी खेल का है उसे चोट लगने या बीमार होने पर वह एआई व गूगल से ही उसका उपचार व दवाई तलाशकर उसका उपयोग कर रहा है। जिससे सबसे अधिक स्ट्रॉराइड का उपयोग किया जा रहा है। यह खिलाड़ी व उनके शरीर के लिए नुकसान दायक है। ऐसे में कई खिलाड़ी तत्काल तो राहत पा रहे हैं लेकिन भविष्य में यह उनके लिए हानिकारक हो रहा है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। बीमारी या चोट में इलाज और दवाई तो डॉक्टर की सलाह से ही लेना बेहतर है।
-अशोक औदिच्य,सचिव बॉडी बिल्डिंग
इंटरनेट पर गलत या अधूरी जानकारी हो सकती है
मान लीजिए किसी व्यक्ति को साधारण सिरदर्द हुआ। वह इंटरनेट पर खोज करता है। वह माइग्रेन, ब्रेन ट्यूमर या अन्य गंभीर बीमारियों की जानकारी देखकर डर जाता है और बार-बार खोज करने लगता है। इससे उसकी चिंता और बढ़ जाती है। एआई बीमारी के बारे में सामान्य जानकारी देने, संभावित कारणों को समझाने के लिए,दवाओं, जांचों और रिपोर्टों को समझाने के लिए तो ठीक है लेकिन एआई आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री नहीं जानता, बॉडी की जांच नहीं कर सकता, कई बीमारियों के लक्षण एक जैसे होते हैं। इंटरनेट पर गलत या अधूरी जानकारी हो सकती है। कभी-कभी गलत निष्कर्ष भी दे सकता है। ऐसे में डाक्टर की सलाह पर ही पूरा भरोसा करना चाहिए।
-डॉ. केवल कृष्ण डंग, वरिष्ठ श्वांस रोग विशेषज्ञ
डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता एआई
एआई का उपयोग आज की आवश्यकता है। इससे बिना नहीं रहा जा सकता। लेकिन हर जगह इसका उपयोग नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से स्वास्थ्य के क्षेत्र में बिना डॉक्टर की सलाह के एआई का उपयोग करना नुकसान दायक हो सकता है। हर बीमारी के कई इलाज हो सकते हैं लेकिन हर इलाज हर व्यक्ति के लिए सही हो यह जरूरी नही हैं। ऐसे में जो काम डॉक्टर का है वह डॉक्टर को ही करने देना चाहिए। एआई सलाह व जानकारी दे सकता है लेकिन डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता।
- चेतन सैनी, निदेशकसुमंगलम ग्रुप
इलाज में विश्वसनीय तो डॉक्टर ही है
एआई सूचनाओं का भंडार है। एआई का उपयोग करके जानकारी प्राप्त की जा सकती है। वहां एक बीमारी के कई इलाज हो सकते हैं। लेकिन वह इलाज हर बीमारी व व्यक्ति पर अलग-अलग काम कर सकता है। ऐसे में एआई का उपयोग बीमारी के इलाज में व्यक्ति को स्वयं नहीं करना चाहिए। साइब्रर कांड्रीरिया की स्थिति बहुत खतरनाक है। इससे एंजाइटी बढ़ती है। जो रोग का रूप ले लेती है। एआई वही बताता है जो उसमें फीड किया हुआ है उसका अपना कोई निर्णय नहीं होता है। बीमारी में डॉक्टर का इलाज ही सही रहता है। इलाज में डॉक्टर ही विश्वसनीय है।
-आशुतोष माथुरिया, प्रिंसीपल, महात्मा गांधी मल्टीपरपज स्कूल गुमानपुरा
विकसित देश के लिए तकनीकी जरूरी
अभी की युवा पीढ़ी एआई का उपयोग कर रही हैं और हेल्थ सहित अन्य विभिन्न मामलों में एआई से सलाह ले रही है जो कि गलत हैं। वर्मा के अनुसार इंसान कितनी भी तरक्की कर ले पर उसको अपनी जड़े नहीं छोड़नी चाहिए। यदि आजकल के युवा तकनीकी पर निर्भर रहेंगे तो दिक्कत आएंगी। अब रोबोटिक सर्जरी हो रही हैं। यदि किसी की तबीयत खराब है तो वहां एआई से सलाह लेने के बजाय डॉक्टर के पास जावे और इलाज लेंवे। वहीं हम अभी इसी फील्ड़ में कार्य कर रहे है संभवतया 2027 तक हम जो डॉक्टर ओपीडी मे मरीज देखते है उनके लिए भी कुछ तकनीकी लेकर आ रहे हैं। उदाहरण देकर समझाया कि हमारे साथी को पीलिया के लक्षण दिखा रहे थे हमने जब डॉक्टर को दिखाया तो वहां अलग ही बीमारी निकाली। फिर हमने डॉक्टर की सलाह से इलाज करवाया। वहीं इसमें पारिवारिक संस्कार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तकनीक का सहारा लेमना चाहिए। तभी हम विकास कर सकेंगे। लेकिन स्वास्थ्य संबंधित मामलों में केवल चेट जीपीटी या इंटरनेट पर ही भरोसा करना नुसान पहुंचा सकता है।
-जितेंद्र वर्मा, स्टार्टअप आर्किटेक्ट एन्ड प्रोजेक्ट राइटर(एआई)
आधी-अधूरी जानकारी में खुद ही उलझ जाते हैं
बच्चे आज कल घरवालों से बात नहीं करते और घर वाले भी बच्चों से सीधे संपर्क में नहीं रहते है। जिससे अभिभावक बच्चों के बारे में समझ नहीं पाते और उनकी समस्याओं को भी नहीं समझ पाते। बाद में डॉक्टरों से समाधान पूछते हैं। उसके बाद एआई पर समाधान पूछने के बाद डॉक्टर के पास पहुंचते है और अपना अनुभव बताते हैं। जिसके बाद एआई से परामर्श लेते है जो मरीज को उल्टा उलझा देता हैं। अंत में डॉक्टर के पास जाते हैं और एआई से आधी-अधूरी जानकारी लेकर लोग खुद ही उलझ जाते है।
-वंदना योगी, वाईस प्रिंसिपल गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल वल्लभनगर

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