प्रतिबंध के बावजूद टैंकों की हो रही मैनुअल सफाई, मशीनों से करवाई जाती हैं टैंक की सफाई

हादसों के बाद भी निगम प्रशासन नहीं कर रहा कार्रवाई

प्रतिबंध के बावजूद टैंकों की हो रही मैनुअल सफाई, मशीनों से करवाई जाती हैं टैंक की सफाई

जहां मशीनों से सफाई नहीं हो सकती उसके लिए रोबोटिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।

कोटा। प्रदेश में सीवरेज व कैमिकल टैंकों और मेन हॉल की सफाई मेनुअल करवाना प्रतिबंधित होने के बावजूद भी कई जगह पर मैनुअल सफाई करवाई जा रही है। जिससे आए दिन हादसे हो रहे हैं। उसके बाद भी निगम व जिला प्रशासन द्वारा ऐसा करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। गत दिनों जयपुर के सांगानेर स्थित एक कम्पनी के कैमिकल टैंक में सफाई कार्य करने उतरे चार मजदूरों की जहरीली गैस से मौत हो गई थी। जबकि दो मजदूरों की हालत गम्भीर होने से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस तरह के कई हादसे कुछ समय पहले कोटा में भी हो चुके हैं। फिर चाहे वह फैक्ट्री में हो या निजी स्थानों पर टैंक सफाई करते समय हुए हैं। राज्य में पूर्व में सीवरेज टैंक व मेन हॉल की सफाई का कार्य श्रमिकों से मैनुअल कराया जाता था। जिससे आए दिन टैंक से निकलने वाली जहरीली गैस से दम घुटने पर मजदूरों की मौत हो रही थी। उसे देखते हुए राज्य सरकार ने कई साल पहले ही मेनुअल सफाई करवाना बंद कर दिया। 

मशीनों से करवायी जाती हैं टैंक की सफाई
राज्य सरकार द्वारा टैंक की मेनुसल सफाई प्रतिबंधित करने के बाद नगर निगम द्वारा अब मेनुअल सफाई नहीं करवाई जाती है। पहले निगम के स्तर पर मेनुअल सफाई के टेंडर होते थे। वह भी समाप्त कर दिए हैं। अब निगम के स्तर पर टैंक व मेन हॉल की सफाई मशीनों से ही करवाई जा रही है। प्राइवेट स्तर पर हो रही अभी भी मैनुअल सफाई: नगर निगम द्वारा मशीनों से सफाई करवाने के बाद भी शहर में अभी भी कई जगह पर प्राइवेट स्तर पर कई जगह पर टैंकों की मेनुअल सफाई करवाई जा रही है। ट्रेक्टर मशीनों के साथ ही मजदूरों को टैंक में उतारा जा रहा है। जिसके लिए लोगों को अधिक राशि का भुगतान करना पड़ रहा है और हादसों का भी खतरा बना हुआ है। 

बिना सुरक्षा टैंक में उतरने से हो रहे हादसे
नगर निगम कोटा दक्षिण के अधिशाषी अभियंता रविन्द्र सैनी ने बताया कि सरकार द्वारा सीवरेज व कैमकिल टैंकों की मैनुअल सफाई करवाना प्रतिबंधित किया हुआ है। उसके बाद से नगर निगम द्वारा सिर्फ मशीनों से ही सफाई करवाई जा रही है। लेकिन कई बार टैंक सूखा होने से मशीनों से सफाई नहीं हो पाती है। इस कारण से कुछ लोग प्राइवेट स्तर पर श्रमिकों से मेनुअल सफाई करवा रहे हैं जबकि यह गलत है। वह भी बिना सुरक्षा उपकरण व मास्क के टैंक में उतरने से हादसे हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि नगर निगम द्वारा 750 से 1 हजार रुपए में मशीनों से टैंकों की सफाई करवाई जा रही है। जहां मशीनों से सफाई नहीं हो सकती उसके लिए रोबोटिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। सरकार ने इस बार बजट में कोटा के लिए रोबोटिक मशीनों की घोषणा की है। नगर निगम के पास सीवरेज सफाई की पर्याप्त मशीनें हैं। कोई भी व्यक्ति निगम में निर्धारित राशि जमा करवाकर मशीनें मंगवा सकता है। सैनी ने बताया कि निगम के स्तर पर फिलहाल कोई भी शिकायत लम्बित नहीं है। जितनी सूचनाएं प्राप्त हुई उन सभी का 24 घंटे में निस्तारण किया जा रहा है। 

जानकारी नहीं मिलने से नहीं हो पाती कार्रवाई
एक्सईएन सैनी ने बताया कि प्राइवेट स्तर पर मेनुअल सफाई करवाने व हादसे होने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई का नगर निगम के पास अधिकार व प्रावधान है। लेकिन उसकी जानकारी समय पर नहीं मिल पाती। कई बार हादसे होने के बाद ही पता चलता है। जिससे संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है। 

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