असर खबर का - एक साल से दहशत मचा रहे दानव को फ्लोटिंग केज से पानी में ही दबोचा

वन्यजीव विभाग ने सीवी गार्डन के तालाब से मगरमच्छ को पकड़ा

असर खबर का -  एक साल से दहशत मचा रहे दानव को फ्लोटिंग केज से पानी में ही दबोचा

नवज्योति की मेहनत और वन्यजीव विभाग का प्रयास लाया रंग।

कोटा। कोटा, प्रदेश का पहला ऐसा जिला है, जहां वन्यजीव विभाग ने पानी में जाकर मगरमच्छ  का रेस्क्यू करने में सफलता हासिल की है। पिछले एक साल से सीवी गार्डन में दहशत मचा रहा मगरमच्छ को आखिरकार रविवार को धर-दबोच लिया है। 6 फिट लंबे और 60 किलो वजनी मगरमच्छ से मॉर्निंग वॉकर्स, पर्यटक दहशत में थे। चूंकी, मगरमच्छ पानी में था इसलिए वन्यजीव विभाग रेस्क्यू नहीं कर पा रहा था। ऐसे में हाल ही में आॅस्टेÑलियन तकनीक से तैयार किया गया प्रदेश का पहला फ्लोटिंग क्रोकोडाइल केज को तालाब में लगाया। पिछले 15 दिन के प्रयास के बाद आखिरकार मगरमच्छ पिंजरे में कैद हो गया। मगरमच्छ के पकड़े जाने से मॉर्निंग वॉकर्स, पर्यटक व शहरवासियों ने खुशी जताते हुए दैनिक नवज्योति का आभार जताया। 

पानी में तैरते पिंजरे में यूं फंसा मगरमच्छ
वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि गत वर्ष से ही मगरमच्छ को पकड़ने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन पानी में होने के कारण रेस्क्यू सफल नहीं हो पा रहा था। ऐसे में गत 27 मार्च को को 12 फीट लंबे और 3 फिट चौड़े फ्लोटिंग क्रोकोडाइल कैज को गार्डन के तालाब में लगाकर 5 किलो पाड़ा मांस बांधा। इसके बाद उसके पिंजरे में आने का इंतजार करते रहे। आखिरकार 15 दिन बाद वह मांस खाने जैसे ही पिंजरे में आया तो वह ट्रैप हो गया। इस पर सीवी गार्डन के संवेदक से सूचना मिलने पर तुरंत टीम  मौके पर पहुंची और तालाब से पिंजरे को बाहर निकाल  चिड़ियाघर ले आए। जिसे बाद में चंबल नदी में शिफ्ट किया जाएगा। इसकी उम्र करीब 8 से 10 साल है। 

बोटिंग में बच्चों पर हमले का रहता था डर  
सीवी गार्डन के तालाब में केडीए द्वारा पेडल बोटिंग करवाई जाती है। जबकि, इसी तालाब में मगरमच्छ छुपा हुआ था। बोट में छोटे बच्चे भी होते हैं, जो पानी में भी हाथ डाल देते हैं। ऐसे में मगरमच्छ के हमले का डर बना रहता है। वहीं, तालाब किनारे पर्यटकों के सेलफी लेते समय मगरमच्छ के हमले का डर बना रहता था। 

दैनिक नवज्योति ने लगातार उठाया था मामला
गत वर्ष मई माह में पहली बार सीवी गार्डन के तालाब में मॉर्निंग वॉकर्स को मगरमच्छ नजर आया था। इसके बाद वह अक्टूबर में फिर से नजर आया और बतखों पर हमला किया। घटना के बाद से ही पर्यटकों, मॉर्निंग वॉकर्स व श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई। दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर वन विभाग व जिला प्रशासन का इस ओर ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद वन्यजीव विभाग मगरमच्छ को रेस्क्यू करने को मजबूर हुआ और आखिरकार को पकड़ने में सफलता हासिल हुई। सीवी गार्डन के स्टाफ, मॉर्निंग वाकर्स, पर्यटक व शहरवासियों ने नवज्योति का आभार जताया।  

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प्रदेश में पहली बार पानी में मगरमच्छ का रेस्क्यू
डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि कोटा वन्यजीव विभाग ने पानी में मगरमच्छ को रेस्क्यू करने में सफलता हासिल की है। संभव: यह प्रदेश का पहला मामला है। मगरमच्छ के कारण गार्डन में आने वाले पर्यटक व मॉर्निंग वॉकर्स अनहोनी की आशंका से आशिंकित थे।  पहले हमने तालाब किनारे पैंथर का पिंजरा लगाकर उसे पकड़ने की कोशिश की थी लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान सहायक वनपाल प्रेम कंवर के सुझाव पर आॅस्ट्रेलियन तकनीक से फ्लोटिंग क्रोकोडाइल कैज (पानी में तैरता पिंजरा) बनवाकर तालाब में लगाया, जिसका फायदा मगरमच्छ के रेस्क्यू के रूप में मिला। 

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नवज्योति का आभार 
पिछले साल से सीवी गार्डन के तालाब में मगरमच्छ ने आतंक मचा रखा था।  पूर्व में बतखों पर हमला कर शिकार कर चुका है। तालाब किनारे मंदिर है, जहां श्रद्धालुओं पूजा करने जाते हैं, ऐसे में अनहोनी का डर सताता था। दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरे प्रकाशित कर वन विभाग को मगरमच्छ को रेस्क्यू करने पर मजबूर किया। नवज्योति की वजह से ही मगरमच्छ का रेस्क्यू हो सका। इसके लिए नवज्योति का बहुत-बहुत आभार।
- डॉ. सुधीर गुप्ता, मॉर्निंग वॉकर

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ठप हो गई थी बोटिंग 
दिनभर में 200 रुपए भी नहीं आते थे। कर्मचारियों की तनख्वाह निकालना भी मुश्किल हो गया था। वन विभाग के अधिकारियों को केडीए के माध्यम से पत्र  दिलवाकर मगरमच्छ को पकड़ने का आग्रह किया था लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। इस पर दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर वन विभाग और प्रशासन को गंभीर समस्या से रुबरू कराया। इसके बाद ही वन विभाग रेस्क्यू करने पर मजबूर हुआ। ज्वलंत मुद्दे को अंजाम तक पहुंचाने के लिए दैनिक नवज्योति का बहुत-बहुत आभार। 
- शिव शर्मा संवेदक सीवी गार्डन

दो-तीन और बनवाएंगे फ्लोटिंग क्रोकोडाइल कैज 
पानी में से मगरमच्छ को रेस्क्यू करने का प्रदेश का यह  पहला मामला है। फ्लोटिंग क्रोकोडाइल कैज की वजह से ही सफलता मिली है। वर्ष 2024 में सहायक वनपाल प्रेम कंवर शक्तावत मगरमच्छ रेस्क्यू प्रशिक्षण के लिए आॅस्टेÑलिया गई थी।  वहां पानी में मगरमच्छ को रेस्क्यू के लिए तैरते पिंजरों का उपयोग किया जाता है। ऐसे में प्रेम कंवर ने वहां पिंजरों को बनाने की टेक्निक समझी और उनके सुझाव पर हमने कोटा में फ्लोटिंग क्रोकाइल केज तैयार करवाया। 
- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा 

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