वसूली पर ध्यान, खतरे में यात्रियों की जान

पांच किमी की सड़क पर जगह-जगह डिवाइडर अधूरे

वसूली पर ध्यान, खतरे में यात्रियों की जान
टैक्स देने के बाद भी एनएच-27 पर जोखिमभरा सफर, न डिवाइडर न पौधे, वाहन चालकों पर हाई बीम का कहर।

कोटा। कोटा-बारां फोरलेन के हालात इतने बदतर हो रहे हैं कि हर दिन हजारों लोगों की जान दांव पर लगी रहती है। एनएचएआई का सिर्फ टोल वसूली पर ही फोकस है लेकिन सुरक्षा मानकों की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है।हालात यह हैं, एनएच-27 स्थित पोलाईकलां से कोटा मार्ग पर न व्यवस्थित डिवाइडर हैं और न ही पौधे, ऊपर से हाई बीम का कहर अलग से बना हुआ है, जिससे वाहन चालकों की जान दांव पर लगी रहती है। टोल टैक्स चुकाने के बावजूद यात्रियों को सुरक्षित सफर नहीं मिल रहा। जिम्मेदारों की लापरवाही से हाल ही में एनएच-52 पर हुए दर्दनाक बस हादसा जैसा खतरा मंडरा रहा है।

हाई बीम से चौंधिया रहीं आंखें, बढ़ रहा खतरा
फोरलेन पर पोलाई कलां से आगे कोटा की ओर डिवाइडर सड़क से बिलकुल सटे हुए हैं। जिनमें कई जगह पौधे नहीं हैं तो कई जगह सूख गए। जिससे कोटा से बारां जाने वाले भारी वाहनों की तेज हाई बीम लाइट सामने से दूसरी लेन से कोटा आने वाले वाहन चालकों की आखों पर सीधे पड़ती है। तेज रोशनी से आंखें चौंधिया जाती हैं। इससे कुछ क्षण के लिए विजिबिलिटी खत्म हो जाती है और हादसे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

रात का सफर जोखिम भरा
वाहन चालक शोयब खान, आकाश मेहरा, राजीव सेन का कहना है कि बारां से कोटा फोरलेन पर पोलाईकलां से आगे का रास्ता बेहद जोखिमभरा है। करीब पांच किमी की सड़क पर जगह-जगह से डिवाइडर आधे-अधूरे बने हुए हैं, वह भी नेशनल हाइवे आॅथोरिटी के मापदंड के अनुरूप नहीं है। इन पर न तो पीली लाइनिंग हो रही और न ही सुरक्षा दीवार है। इसके अलावा पौधे नहीं होने से वाहनों की तेज रोशनी सीधे आंखों पर पड़ती है। जिससे कुछ दिखाई नहीं देता और रफ्तार से चल रहे वाहन अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ने का खतरा बना रहता है। जबकि, पहले घने पौधे थे, जो हाई बीम की रोशनी को रोकते थे, लेकिन अब उनकी अनुपस्थिति से रात में सफर बेहद जोखिम भरा हो गया है।

रोड लाइनिंग नहीं, लेन का अंदाजा मुश्किल
गत वर्ष एनएचएआई द्वारा पोलाईकलां से कोटा टर्न तक डामर सड़क बनाई थी लेकिन उस पर सफेद लाइनिंग नहीं की गई। इससे वाहन चालकों को अपनी लेन समझने में दिक्कत होती है और ओवरटेक के दौरान दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। वहीं,पूरे मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें नहीं होने से सड़क पर अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में हाई बीम की रोशनी और भी ज्यादा घातक हो जाती है।

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कट से पहले चेतावनी लाइट भी नदारद
वाहन चालक कमलेश दीक्षित व यश कुमार का कहना है कि नेशनल हाइवे पर कुछ जगहों पर कट होते हैं, जिसका संकेत देने के लिए लाइट लगी होती है, जिससे 100 से 150 मीटर पहले ही कट होने की जानकारी चालक को मिल जाती है। इस दौरान वह स्पीड कम कर सकता है। लेकिन, पोलाईकलां से कोटा तक केवल एक ही लाइट लगी है। इसके अलावा पूरे रोड पर कही इस तरह की लाइटें लगी हुई नहीं है। ऐसे में स्पीड से गुजरने वाले वाहनों को एकाएक कट का पता नहीं लग पाता।

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डिवाइडरों की ऊंचाई नहीं, मवेशियों का खतरा
डिवाइडर सड़क से सटे हुए हैं, जिनकी ऊंचाई नहीं होने से मवेशियों का डिवाइडर पार कर सड़क पर आने का खतरा बना रहता है। इससे वाहन अनियंत्रित होकर दूसरी लेन में जा सकते हैं, जिससे गंभीर हादसा होने का खतरा बना रहता है।

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दोहरी मार झेल रहे वाहन चालक
जिम्मेदारों की लापरवाही से एनएच-27 पर वाहन चालक दोहरी मार झेल रहे हैं, एक तरफ टोल टैक्स वसूली और दूसरी-सुरक्षा सुविधाओं का अभाव। जबकि, प्रतिदिन हजारों लोग इस मार्ग से आवागमन करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।

कोटा से बारां 104 किमी सड़क पर आवश्यक कार्य स्वीकृत हैं। जिसमें डिवाइडर बनाना, पौधे लगवाना, स्ट्रीट लाइटिंग व रोड लाइनिंग सहित अन्य कार्य शामिल हैं। अभी, बारां साइड पर काम चल रहा है, जल्द ही कोटा साइड का भी काम शुरू हो जाएगा।
-संदीप अग्रवाल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई कोटा 

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