असर खबर का - चंबल के बांधों का बदलेगा स्वरूप, 50 गेट पहली बार होंगे नए
नवजीवन पर खर्च होंगे 236 करोड़ रुपए, 11 फरवरी को होगी निविदा
निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य को 36 माह में पूरा करने का लक्ष्य है।
कोटा। चंबल नदी पर बने कोटा बैराज, राणप्रताप सागर और जवाहर सागर को पहली बार बड़े स्तर पर नवजीवन देने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब 66 साल पुराने इन बांधों के 50 गेट बदले जाएंगे, जिस पर कुल 236 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 11 फरवरी को निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जल संसाधन विभाग के अनुसार अब तक इन बांधों के गेट कभी पूरी तरह बदले नहीं गए थे। समय के साथ गेट, स्लूज सिस्टम और मैकेनिज्म पुराने हो चुके हैं, जिससे संचालन में जोखिम बढ़ गया था। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने तीनों बांधों के व्यापक सुधार और आधुनिकीकरण का निर्णय लिया है।
कोटा बैराज के बदलेंगे 19 गेट
परियोजना के तहत पहली बार कोटा बैराज के 19 गेट बदले जाएंगे। इसके अलावा राणप्रताप सागर बांध के 7 बड़े और 4 छोटे गेट व जवाहर सागर बांध के 10 गेट को भी पूरी तरह बदला जाएगा। इसके साथ ही स्लूज गेट, कंट्रोल सिस्टम और अन्य तकनीकी हिस्सों को भी आधुनिक बनाया जाएगा।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत 236 करोड़ रुपए है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य को 36 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निविदा दस्तावेज 11 फरवरी से उपलब्ध होंगे, जबकि तकनीकी और वित्तीय निविदाएं फरवरी-मार्च में खोली जाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि चंबल के ये तीनों बांध राजस्थान और मध्यप्रदेश के सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए रीढ़ की हड्डी हैं। रणप्रताप सागर और जवाहर सागर से बिजली उत्पादन होता है, वहीं कोटा बैराज से लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई और शहरों को पेयजल मिलता है।
66 साल पुराने बांध आधुनिक तकनीक से होंगे लैस
तीनों बांधों का निर्माण 1960 के दशक में हुआ था। उस समय की तकनीक आज के मानकों के अनुसार पुरानी हो चुकी है। विभागीय रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गेट और मशीनरी की औसत उम्र 40-50 साल होती है, जबकि ये सिस्टम उससे कहीं अधिक समय से उपयोग में हैं। अब नई तकनीक से गेट बदले जाने से संचालन अधिक सुरक्षित, सटीक और तेज होगा। कुल मिलाकर, 236 करोड़ की यह परियोजना चंबल नदी के तीनों बांधों को नया जीवन देगी, जिससे कोटा सहित पूरे हाड़ौती और प्रदेश के जल भविष्य को मजबूती मिलेगी। जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह पहली बार है जब चंबल के तीनों प्रमुख बांधों के गेट एक साथ बदले जाएंगे। इससे बांधों की सुरक्षा बढ़ेगी और आने वाले दशकों तक जल प्रबंधन सुचारू रहेगा।
नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला
चंबल नदी पर बने तीन प्रमुख बांधों के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 30 नवंबर2025 को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि राणा प्रताप सागर (आरपीएस), जवाहर सागर और कोटा बैराज के नवीनीकरण का बहुचर्चित प्रोजेक्ट पिछले 6 वर्षों से फाइलों और निरीक्षणों में अटका हुआ है। इस दौरान प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 100 करोड़ से बढ़कर 236 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसके बाद भी अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। बजट बढ़ने के कारण अब टैंडर की अनुमति भारत नहीं बल्कि अमेरिका स्थित विश्व बैंक मुख्यालय से मिलेगी। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि 200 करोड़ से ऊपर की अनुमति विश्व बैंक के मुख्यालय से आती है। तीनों बांधों के रखरखाव की राशि विश्व बैंक से लोन के रूप में ली जा रही है। विश्व बैंक से अनुमति मिलने के बाद ही टैंडर प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
चंबल नदी पर बने कोटा बैराज, राणप्रताप सागर और जवाहर सागर को नवजीवन देने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब 66 साल पुराने इन बांधों के 50 गेट बदले जाएंगे, जिस पर कुल 236 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 11 फरवरी को निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- आरपी गोयल, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग

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