असर खबर का- लखावा प्लांटेशन में भ्रष्टाचार पर एनजीटी सख्त, दोषी अफसरों पर कठोर कार्रवाई और वसूली के निर्देश
नवज्योति ने उजागर किया था प्लांटेशन में भ्रष्टाचार
कोटा। कोटा वन मंडल के लखावा प्लांटेशन में हुए भ्रष्टाचार व सरकारी धन के गबन के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है।14 अगस्त को हुई सुनवाई में मामले को बेहद गंभीर मानते हुए राजस्थान फोरेस्ट के प्रमुख सचिव और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) को तत्काल हस्तक्षेप कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने व दो सप्ताह में अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
एनटीजी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई बिलों को पास करने में किए गए गबन और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन में सरकारी धन के दुरुपयोग के संबंध में की जानी चाहिए। चूंकि, यह राजकीय कोष और सार्वजनिक धन का नुकसान है, इसलिए हर हाल में इसकी रक्षा की जानी चाहिए। वहीं, जाली बिल बनाकर उन्हें तैयार करने, निकालने और प्रस्तुत करने में जो राशि गलत तरीके से उपयोग या गबन की गई है, उसकी वसूली करने के साथ-साथ दोषियों को दंडित भी किया जाना चाहिए।
सरकारी धन की हर हाल में हो सुरक्षा
एनजीटी ने लखावा प्लांटेशन में हुए सरकारी धन के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए फोरेस्ट सचिव व हॉफ को सरकारी धन की हर हाल में हो सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सरकार द्वारा कैम्पा फंड में दिए जाने वाले बजट-अनुदान का सही उपयोग हो, ऐसी नियंत्रण व्यवस्था की जानी चाहिए।
ऐसी कार्रवाई करें, दोबारा न हो ऐसा गबन
एनजीटी ने उम्मीद जताई कि फोरेस्ट सचिव और प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा पर्यावरण हित में तत्कालीन दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे। कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए, जिससे भविष्य में इस तरह के मामले दोबारा सामने न आएं। अधिकरण ने दोनों अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी। तब तक राज्य सरकार को एनजीटी के निर्देशों पर की गई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
नवज्योति ने उजागर किया था भ्रष्टाचार
दैनिक नवज्योति ने 23 मई 2024 से 29 जनवरी 2026 तक सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित कर लखावा प्लांटेशन में हुए भ्रष्टाचार और सरकारी धन का गबन उजागर किया था। जिसके बाद वन विभाग ने मुख्यालय जयपुर से अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन सुरक्षा) केसी मीणा को कोटा भेज प्लांटेशन की जांच करवाई थी। उनकी रिपोर्ट में न केवल नवज्योति की खबर पर मोहर लगी बल्कि विभाग की आंख खोलने के लिए नवज्योति को आई ओपनर माना था।
एपीसीसीएफ की रिपोर्ट में प्लांटेशन फेल मिला
एनजीटी के समक्ष रखी जांच रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन सुरक्षा) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि लखावा-8 में पूरे क्षेत्र का निरीक्षण करने के बावजूद 100 पौधे भी नहीं मिले, जबकि 8 हजार पौधे लगाने का दावा किया गया था। उन्होंने रिपोर्ट में वृक्षारोपण को पूरी तरह असफल बताया।
21.42 लाख का गबन, सरकार के साथ धोखा
कोटा पीएंडएम गणना दल के उप वन संरक्षक ने 30 सितंबर से 4 अक्टूबर 2024 के बीच दोबारा लखावा-8 प्लांटेशन की जांच की। रिपोर्ट में पौधों के रखरखाव के नाम पर खर्च हुए 21 लाख 42,106 रुपए को सरकार के साथ धोखा, गबन बताया गया। इसमें काम प्रमाणित करने वाले वन अधिकारियों, फर्जी बिल तैयार कर भेजने वाले कर्मचारियों और वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष से राशि वसूलने की बात कही गई।
गबन छिपाने को भरी गर्मी में लगाए पौधे
13 अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट में कुछ वृक्षारोपण नवंबर-दिसंबर 2023 और मार्च-जून 2024 में किए जाने का उल्लेख था। भरी गर्मी में पौधारोपण कैसे हुआ, जांच अधिकारियों ने इस पर सवाल उठाया। रिपोर्ट में यह आशंका भी दर्ज की गई कि या तो पौधे लगाए ही नहीं गए या फिर उनके नाम पर फर्जी बिल निकाले गए।

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