असर खबर का : नए रंग में नजर आने लगी एमबीएस इमरजेन्सी की ट्रालियां, कांच के कमरे से निकलकर मरीजों की सेवा में पहुंची
पहचान और रिकवरी आसान
नीले रंग की पहचान से खत्म होगी स्ट्रेचर की किल्लत।
कोटा। एमबीएस अस्पताल में इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को अब स्ट्रेचर के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन ने एक अनूठा प्रयोग करते हुए इमरजेंसी की 18 ट्रॉलियों को विशेष नीले रंग से पुतवा दिया है। प्रशासन ने 8 अन्य नई ट्रॉलियां भी इमरजेंसी विभाग को हैंडओवर कर दी हैं, जिससे अब स्ट्रेचरों की कुल उपलब्धता 26 हो गयी है। साथ ही ट्राली मेन और ईचार्ज काे भी इन्हें संभालने और ऑपरेट करने में लगने वाले समय में भी भारी कमी आयेगी।
पहचान और रिकवरी आसान
नीले रंग की वजह से अब ये ट्रॉलियां वार्डों में गुम नहीं होंगी। अस्पताल परिसर में कहीं भी नीला स्ट्रेचर दिखने पर ट्रॉली इंचार्ज उसे तुरंत रिकवर कर इमरजेंसी में ला सकेंगे। प्रबधंधन की और से बताया गया है कि पहले मरीज अपनी सुविधा के लिये ले जाते थे जिन्हे कहीं भी छोड़ देते थे ऐसे में इन्हे ढुढ़ंने मे खासी परेशानी होती थी।
स्थान में बदलाव- बेसमेंट के पास बना नया 'ट्रॉली स्टैंड'
अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए अब नई बिल्डिंग के मेन गेट के पास, बेसमेंट पार्किंग के बगल में एक स्थाई ट्रॉली स्टैंड बना दिया गया है। अब सभी ट्रॉलियां एक ही स्थान पर मिलेंगी। जिससें आने वाले मरीजों को अब बाहर से ही इन्हे उपलब्धता हो जायेगी।
खबर का असर
दैनिक नवज्योति ने 26 मार्च को 25 ट्रॉलियां कांच के कमरे में शीर्षक से प्रकाशित समाचार में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया गया था कि कैसे एक तरफ मरीज स्ट्रेचर के लिए तड़प रहे हैं और दूसरी तरफ नई ट्रॉलियां तालों में बंद हैं। इस खबर के बाद हरकत में आए अस्पताल प्रशासन ने बुधवार को न केवल ट्रॉलियों को बाहर निकाला, बल्कि उनकी सुचारू उपलब्धता के लिए नई व्यवस्था भी लागू कर दी।
अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं थी, लेकिन उनके मिस-मैनेजमेंट को सुधारने के लिए अब कलर कोडिंग और नया पार्किंग बेसमेंट बनाया गया है ताकि आपातकालीन स्थिति में तुरंत स्ट्रेचर मिल सके। नर्सिंग अधीक्षक की देखरेख में ट्रॉली इंचार्ज इसकी जिम्मेदारी संभालेंगे।
- डाॅ.धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस हॉस्पिटल

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