अगले दशक में रक्षा तकनीक के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष देशों में होगा भारत : डॉ. टेसी थॉमस

मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया से दैनिक नवज्योति की खास बातचीत

अगले दशक में रक्षा तकनीक के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष देशों में होगा भारत : डॉ. टेसी थॉमस
मिसाइल वुमन ने साझा किए अनुभव, बोलीं-विज्ञान में सफलता के लिए जेंडर नहीं , ज्ञान और लगन मायने रखते हैं।

कोटा। मिसाइलों की ताकत हो या रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता का संकल्प, भारत आने वाले दशक में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल होगा। देश के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों में अपार क्षमता है और भारत के पास भी विकसित देशों के समान उन्नत तकनीक उपलब्ध है। जरूरत इस क्षमता का बेहतर उपयोग करने और लगातार नवाचार को बढ़ावा देने की है। यह कहना है देश की प्रसिद्ध वैज्ञानिक और डीआरडीओ की पूर्व महानिदेशक डॉ. टेसी थॉमस का।

मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया के नाम से पहचान बनाने वाली डॉ. थॉमस रविवार को कोटा आईं। एक निजी स्कूल के वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचीं डॉ. थॉमस ने दैनिक नवज्योति से विशेष बातचीत में अपने वैज्ञानिक सफर, मिसाइल तकनीक, रक्षा क्षेत्र में भारत की संभावनाओं और विज्ञान में बेटियों की भागीदारी पर विचार साझा किए। उनका मानना है कि विज्ञान में सफलता के लिए जेंडर नहीं, बल्कि ज्ञान, एकाग्रता और लगन मायने रखती है। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश...

कलाम के मार्गदर्शन में शुरू हुआ मिसाइलों का सफर
डॉ. टेसी थॉमस ने बताया कि मिसाइल टेक्नोलॉजी की पढ़ाई के बाद उन्होंने डीआरडीओ हैदराबाद में काम शुरू किया। उस समय मिसाइल मैन एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम संस्थान के निदेशक थे। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके मार्गदर्शन और डीआरडीओ के सहयोग से मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में काम करना उनके लिए गर्व की बात रही। विज्ञान में लैंगिक भेदभाव की कोई जगह नहीं है। ज्ञान और समझ के बल पर हर चुनौती का सामना किया जा सकता है। 

टीमवर्क से मिली अग्नि-4 और अग्नि-5 को सफलता
अग्नि-4 और अग्नि-5 जैसी महत्वपूर्ण मिसाइल परियोजनाओं से जुड़े अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि बड़े वैज्ञानिक प्रोजेक्ट किसी एक व्यक्ति के प्रयास से पूरे नहीं होते। इनके पीछे पूरी टीम का सामूहिक योगदान होता है। तकनीक के विकास में कई चुनौतियां आती हैं, लेकिन वैज्ञानिक और इंजीनियर साझा लक्ष्य के साथ काम करते हैं। टीमवर्क ही सफलता का सबसे बड़ा आधार है।

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बेटियां किसी भी क्षेत्र में नहीं हैं पीछे
विज्ञान और तकनीक में करियर बनाने की इच्छुक युवतियों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। एकाग्रता और लगन के साथ विज्ञान को समझें तो अंतरिक्ष विज्ञान और मिसाइल तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं। शिक्षा और ज्ञान ही आगे बढ़ने की सबसे बड़ी ताकत हैं।

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परिवार के सहयोग से काम पर कर सकीं फोकस
निजी जीवन और वैज्ञानिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन पर उन्होंने कहा कि इसके लिए समय प्रबंधन जरूरी था। दिन की शुरुआत जल्दी करनी पड़ती थी और कई बार देर रात तक काम करना होता था। पति, जो नेवी में अधिकारी हैं, और माता-पिता का पूरा सहयोग मिला। इसी समर्थन से वे अपने काम पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर सकीं।

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आज के बच्चे तकनीक में दस गुना आगे
आज की पीढ़ी के बच्चों के बारे में उन्होंने कहा कि वर्तमान बच्चे हमारी पीढ़ी से दस गुना आगे हैं। वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, आइडिया डेवलपमेंट और इनोवेशन जैसी तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं। बच्चों को सही दिशा और अवसर मिलें तो वे भविष्य में बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

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