सांभर और हिरणों की जिंदगी निगल गई पॉलीथिन : 6 वन्यजीवों की दर्दनाक मौत, सांभर व हिरणों के पेट से निकली 10 से 15 किलो पॉलीथिन

सैन्य व स्टेशन क्षेत्र से रेस्क्यू हुए वन्यजीवों की मौत बना प्लास्टिक कचरा

सांभर और हिरणों की जिंदगी निगल गई पॉलीथिन : 6 वन्यजीवों की दर्दनाक मौत, सांभर व हिरणों के पेट से निकली 10 से 15 किलो पॉलीथिन

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा : भूख व बीमारी से नहीं पॉलीथिन से हुई वन्यजीवों की मौत।

कोटा। शहरवासियों की लापरवाही और बढ़ता प्लास्टिक कचरा अब जंगल के प्राणियों पर मौत बनकर टूट रहा है। पिछले दिनों सैन्य क्षेत्र और रेलवे स्टेशन के आसपास से रेस्क्यू किए सांभर व हिरणों की दर्दनाक मौत हो गई। इनका चिड़ियाघर रेस्क्यू सेंटर में पोस्टमार्टम किया गया तो भयानक मंजर देखने को मिला। प्रत्येक वन्यजीव के पेट से 10 से 15 किलो पॉलीथिन निकला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि इन मासूस वन्यजीवों की मौत भूख या बीमारी से नहीं, बल्कि प्लास्टिक निगलने से हुई है।

पॉलीथिन ने ब्लॉक किया पाचन तंत्र
सैन्य व रेलवे स्टेशन क्षेत्र में कुछ दिनों पहले 6 सांभर व हिरण मृत अवस्था में मिले थे। जिन्हें वन विभाग की टीम रेस्क्यू कर कोटा चिड़ियाघर आई। जहां वन्यजीव चिकित्सक द्वारा पोस्टमार्टम किया। जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार, सभी हिरणों के पाचन तंत्र में भारी मात्रा में प्लास्टिक आधारित कचरा जमा था। प्रत्येक मृत वन्यजीव के पेट से करीब 10 से 15 किलो प्लास्टिक कचरा निकला। जिससे पाचन तंत्र पूरी तरह ब्लॉक हो गया। जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई।

आंतों में सूजन, अंदरुनी अंगों को गंभीर नुकसान 
वन्यजीव विभाग के एसीएफ पंकज सिंह मीणा ने बताया कि सैन्य व स्टेशन क्षेत्र में सांभर व हिरणों का हैबीटेट है। लोग खाद्यय साम्रगी को प्लास्टिक की थैलियों में बांधकर फैंक देते हैं। जिसे भोजन की तलाश में विचरण कर रहे वन्यजीव निगल लेते हैं। जिससे भोजन के साथ पॉलीथिन भी शरीर में जाकर आंतों में फंस जाती है, जो पेट में प्लास्टिक की गांठ बनकर आंतों को गंभीर नुकसान पहुंचाती है। नतीजन, भूख न लगना, कमजोरी, सूजन और आंतरिक अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। यह परिस्थितियां धीरे-धीरे उन्हें मौत की तरफ धकेल देती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि मृत वन्यजीवों की पॉलीथिन के कारण आंतों में सूजन थी और अंदरुनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा, जो उनकी मौत का कारण बनी।

प्लास्टिक से वन्यजीवों पर गंभीर असर
एसीएफ मीणा ने बताया कि प्लास्टिक निगलने से हिरणों में पोषक तत्वों की पूर्ति रुक जाती है। वजन तेजी से घटता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। माइक्रोप्लास्टिक रुमेन की प्राकृतिक प्रक्रिया को बाधित करता है, जिससे ऊर्जा उत्पादन कम होता है। साथ ही प्लास्टिक से निकलने वाले रसायन हार्मोन असंतुलन और प्रजनन संबंधी समस्याएं भी पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में पॉलीथिन मिलना क्षेत्र में गंभीर प्लास्टिक प्रदूषण की ओर इशारा करता है। यह खतरा केवल सांभर तक सीमित नहीं है, बल्कि चीतल सहित अन्य शाकाहारी वन्यजीव भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

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सैन्य व स्टेशन क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त करने की जरूरत
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने सैन्य क्षेत्र और रेलवे स्टेशन के आसपास के इलाकों को प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र घोषित करने की मांग की है। साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्त प्रतिबंध, नियमित सफाई अभियान और प्रभावी कचरा प्रबंधन प्रणाली लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, वन क्षेत्रों में देशी पौधों का रोपण कर हिरणों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक भोजन स्रोत विकसित किया जाए ताकि वन्यजीव की जान बच सके।

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जैव विविधता के लिए खतरा
शाकाहारी जीवों की मृत्यु से पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित होता है। उनकी संख्या घटने से शिकारी जीवों के लिए भोजन की कमी और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है। माइक्रोप्लास्टिक मिट्टी और पौधों को भी नुकसान पहुंचाकर जैव विविधता को खतरे में डालता है। यह उसी क्षेत्र में भोजन तलाश करने वाले अन्य वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

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हबीर्वोर का करेंगे पुनर्वास
सैन्य व स्टेशन क्षेत्रों से कुछ सांभर व हिरणों का रेस्क्यू किया गया था। पोस्टमार्टम कराने पर सामने आया कि उनके पेट से करीब 15 किलो पॉलीथिन निकली, जो उनकी दर्दनाक मौत का कारण बनी। इस संबंध में सैन्य अधिकारियों को पत्र लिख वन्यजीवों को ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित वनक्षेत्र में शिफ्ट करने की परमिशन ली जाएगी। साथ ही उनके एरिया में भोजन सामग्री को पॉलीथिन में बांधकर न फैंकने के लिए जागरूक किया जाएगा। वहीं, घरों से निकलने वाली खाद्य सामग्री को फेंकने के लिए कचरा पात्र रखने व जगह-जगह साइन बोर्ड लगाने का आग्रह करेंगे।
-अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा

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