निगम की गौशाला में गौवंश के लिए गर्मी से बचाव के नहीं हैं पुख्ता इंतजाम

आमजन को आश्रय स्थल, गौवंश को छाया तक नहीं

निगम की गौशाला में गौवंश के लिए गर्मी से बचाव के नहीं हैं पुख्ता इंतजाम

निगम अधिकारियों को कई बार लिखित में दे चुके हैं लेकिन अधिकारी गौशाला में आकर व्यवस्थाएं देखना तक नहीं चाहते।

कोटा। शहर में जहां गर्मी का पारा लगातार बढ़ रहा है और यह 40 डिग्री से अधिक हो गया है। ऐसे में इंसान ही नहीं पशु पक्षी भी इस गर्मी से त्रस्त है। नगर निगम की ओर से आमजन के लिए तो आश्रय स्थल, छाया व पानी की व्यवस्था की जा रही है। जबकि निगम की गौशाला में गौवंश को छाया तक नसीब नहीं हो रही है। शहरी क्षेत्र में ही इतनी अधिक गमी है तो ग्रामीण क्षेत्र में  पड़ रही गर्मी का इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। वहां शहर से अधिक तापमान रहता है। वहीं खुले स्थान पर गर्मी अधिक लगती है। इस गर्मी में जहां नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से आमजन के लिए जगह-जगह पर आश्रय स्थल बनाए गए हैं। छाया और पानी की व्यवस्था की गई है। लेकिन नगर निगम की ओर से गौवंश की सुध नहीं ली जा रही है।

गिनती के गौवंश के लिए शेड़
नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। उनमें से गिनती के गौवंश के लिए ही छाया की व्यवस्था है। नगर निगम गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में बहुत कम जगह पर शेड लगा हुआ है। साथ ही पिछले साल बचा हुआ ग्रीन नेट इस बार काम में लिया गया है। जिससे एक से तीन नम्बर के बाड़े में ही लगाया  है। जितने शेड व ग्रीन नेट लगी हुई है। उसमें गिनती के ही गौवंश रह पा रहे है। जबकि क्षमता से अधिक होने से उनके लिए पर्याप्त छाया तक की व्यवस्था नहीं है। सिंह ने बताया कि अधिकतर गौवंश को दिनभर खुले में धूप में ही रहना पड़ रहा है। जिससे पहले जहां सर्दी से वहीं अब गर्मी से गौवंश की मृत्यु दर बढ़ने लगी है।  

बीमार व घायल को शेड
जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गर्मी में छाया की सबसे अधिक आवश्यकता बीमार व घायल गौवंश को है। ऐसे में जो शेड व ग्रीन नेट लगी हुई है। उसमें इसी तरह के गौवंश को रखा हुआ है। जबकि अधिकतर को तो खुले में ही रहना पड़ रहा है। 

पंखे लगे न नेट
गौशाला समिति अध्यक्ष ने बताया कि गौशाला में जितनी जगह है उसके हिसाब से खैल बनाई गई है। जहां गौवंश आसानी से चारा व पानी खा-पी सकते है। लेकिन दोनों निगमों की ओर से घेरा डालकर पकड़े गए मवेशियों के कारण यहां क्षमता से अधिक गौवंश हो गए हैं। जिनके लिए शेड पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि वे गौशाला में हरी नेट व 200 पंखे लगाने के लिए निगम अधिकारियों को कई बार लिखित में दे चुके हैं लेकिन अधिकारी गौशाला में आकर व्यवस्थाएं देखना तक नहीं चाहते। जिससे अभी तक भी इस भीषण गर्मी में न तो वहां पंखे लगे हैं और न ही शेड व हरी नेट लगाई गई है। वहीं किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में भी गौवंश तो क्षमता से अधिक है लेकिन वहां शेड पर्याप्त होने से इतनी अधिक समस्या नहीं है। उन्होंने बताया कि गौशाला में गौवंश के लिए पीने का पानी पर्याप्त मात्रा में है। इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि गौशाला समिति अध्यक्ष द्वारा पूर्व में जो भी काम बताए गए हैं वह सभी करवाए गए हैं। गत वर्ष गर्मी में गौशाला में हरी नेट भी लगाई गई थी। अब यदि आवश्यकता है तो उसे भी शीघ्र पूरा कर दिया जाएगा। 

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