यूडी टैक्स: ढाई हजार प्रोपर्टी कर के दायरे में, नगर निगम ने दिए नोटिस
अब होगी सीजिंग की कार्रवाई
वर्तमान में यूडी टैक्स का लक्ष्य करीब 18 करोड़ रुपए उसमें से अभी 50 फीसदी से ही अधिक लक्ष्य प्राप्त हुआ ।
कोटा। नगर निगम की ओर से हर साल वसूल किया जाने वाला नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) समय पर जमा नहीं करवाने वालों पर अब शिकंजा कसा जाएगा। निगम द्वारा बड़े बकायादारों को नोटिस देने के बाद अब उनके प्रतिष्ठान की सीजिंग की कार्रवाई की जाएगी। पूर्व में जब कोटा में दो नगर निगम उत्तर व दक्षिण थे। उस समय दोनों नगर निगम की बजट बोर्ड बैठकों में अन्य मदों के साथ ही नगरीय विकास कर के भी बजट लक्ष्य तय किए गए थे। हालांकि बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के बाद फिर से नगर निगम एक हो गया है। ऐसे में वर्तमान में नगरीय विकास कर का लक्ष्य करीब 18 करोड़ रुपए हो गया है। लेकिन उसमें से अभी 50 फीसदी से ही अधिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है।
छूट का इंतजार
राज्य सरकार द्वारा हर साल टैक्स जमा नहीं करवाने वालों को राहत देने के लिए ब्याज पेनल्टी में छूट का प्रावधान करती है। जिससे अधिक से अधिक बकायादार बिना ब्याज पेनल्टी के टैक्स जमा करवा सके। हालाकि फरवरी का महीना शुरू हो गया है। अभी तक सरकार ने छूट की घोषणा नहीं की है। जबकि बड़े बकायादार सरकार की छूट का इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार वर्तमान वित्त वर्ष में कर जमा करवाने वालों के लिए अभी समय है। लेकिन जो कर दाता बरसों से बकाया कर जमा नहीं करवा रहे हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वित्तीय वर्ष समाप्त होने में दो माह का समय
वित्तीय वर्ष 2025-26 के समाप्त होने में अब मात्र दो माह का ही समय शेष है। 31 मार्च को वित्त वर्ष समाप्त हो जाएगा। ऐसे में यूडी टैक्स वसूली के लक्ष्य को इन शेष दो माह की अवधि में ही पूरा करना है। जबकि हालत यह है कि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे कर दाता हैं जिन्होंने टैक्स जमा नहीं कराया है। साथ ही कई कर दाता तो ऐसे हैं जो पिछले काफी समय से टैक्स जमा नहीं करवा रहे हैं। उनके खिलाफ नगर निगम अब सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।
दक्षिण में 15 सौ व उत्तर में एक हजार
नगर निगम की ओर से नगरीय कर की वसूली निजी फर्म के माध्यम से की जा रही है। फर्म द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार शहर में करीब 25 सौ प्रोपर्टी ऐसी हैं जो यूडी टैक्स के दायरे में आती हैं। जिनमें से दक्षिण में 15 सौ व उत्तर में एक हजार हैं। जिनमें से करीब एक चौथाई ने ही कर जमा कराया है।
टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर हो सख्ती
लोगों का कहना है कि नगरीय कर के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों को समय पर टैक्स जमा करवाना चाहिए। कर जमा नहीं करवाने वालों पर सख्ती होनी चाहिए। नयापुरा निवासी महेश खत्री का कहना है सरकार ऐसे लोगों को पेनल्टी व सजा देने की जगह टैक्स जमा नहीं करवाने वालों को हर साल छूट का लाभ देकर उपकृत करती है। ऐसा करना गलत है। जबकि समय पर टैक्स जमा करवाने वालों को कोई लाभ नहीं दिया जाता। दादाबाड़ी निवासी रामबाबू नागर का कहना है कि व्यवसायिक प्रतिष्ठान जब कमाई करते हैं तो उन्हें टैक्स भी समय पर देना चाहिए। यह उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन कई कर दाता कार्रवाई का डर नहीं होने से टैक्स जमा नहीं करवाते हैं। जिससे कर जमा करवाने वालों को नुकसान होता है।
इनका कहना है
वित्त वर्ष समाप्त होने में अब मात्र दो माह का भी समय शेष नहीं है। ऐसे में नगरीय विकास कर जमा नहीं करवाने वाले सभी कर दाताओं को धारा 131 के नोटिस दो से तीन बार दिए जा चुके हैं। उसके बाद भी विशेष रूप से बड़े बकायादारों द्वारा टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर अब निगम सख्ती करेगा। ऐसे प्रतिष्ठानों पर अब सीजिंग की कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई शीघ्र ही चालू की जाएगी।
- धीरज सोनी, उपायुक्त राजस्व, नगर निगम कोटा

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