Voice of youth : AI की आसान राह कहीं बच्चों की सोचने की शक्ति तो नहीं छीन रही?
मेहनत और सीखने की प्रवृत्ति में आ रही कमी
कोटा। आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है। पढ़ाई हो, जानकारी जुटानी हो या कोई मुश्किल काम करना हो, AI हर सवाल का जवाब चंद सेकंड में दे रहा है। खासतौर पर बच्चों और युवाओं में AI पर बढ़ती निर्भरता उनके मानसिक, शैक्षणिक और बौद्धिक विकास को प्रभावित कर सकती है। हालांकि AI को पूरी तरह नकारना भी उचित नहीं है। जरूरत इस बात की है कि तकनीक का इस्तेमाल सीखने और समझने के लिए हो, न कि अपनी सोच और मेहनत का विकल्प बनाने के लिए। दैनिक नवज्योति के 'वॉयस ऑफ यूथ' में कॉलेज विद्यार्थियों ने इसी मुद्दे पर अपने विचार साझा किए।
सोचने की आदत पर लग सकता है विराम
AI तकनीक अच्छी है। इससे बड़े से बड़ा काम कुछ ही सेकंड में हो जाता है, लेकिन लगातार इसका इस्तेमाल करना ठीक नहीं है। धीरे-धीरे इसकी आदत पड़ जाती है और बच्चे खुद मेहनत करना पसंद नहीं करते। इससे उनकी सोचने और समझने की क्षमता विकसित नहीं हो पाती। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह चिंता का विषय है। यदि वे हर काम के लिए AI पर निर्भर रहेंगे तो उनका ज्ञान और अनुभव सीमित रह सकता है।
-मुस्कान मीना, कॉलेज स्टूडेंट
जवाब मिल रहे हैं, लेकिन सीखने की क्षमता पर सवाल
AI के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों की खुद सोचने और समझने की क्षमता कम हो सकती है। अब बच्चे किताबें पढ़ने और खुद जवाब खोजने के बजाय सीधे AI से सवाल पूछने लगे हैं। इससे उनकी रीडिंग और राइटिंग स्किल प्रभावित हो सकती हैं। एकाग्रता, याददाश्त और रचनात्मक सोच पर भी असर पड़ने की आशंका है। बच्चे खुद समस्याओं को हल करने का प्रयास नहीं करेंगे तो उनकी सीखने की क्षमता कैसे विकसित होगी? इसके अलावा AI का गलत इस्तेमाल बच्चों की निजी जानकारी के लिए भी खतरा बन सकता है।
-खुशी मीणा, कॉलेज स्टूडेंट
मेहनत के बिना ज्ञान अधूरा
पहले बच्चे किसी नई चीज को सीखने के लिए घंटों किताबें पढ़ते थे। इस दौरान उनकी एकाग्रता बढ़ती थी और कई नई जानकारियां भी मिलती थीं। जरूरी नहीं था कि हर सवाल का जवाब मिल ही जाए, लेकिन उसे खोजने के प्रयास में बहुत कुछ सीखने को मिलता था। अब बच्चे एक शब्द लिखकर AI से जवाब हासिल कर लेते हैं। इससे मेहनत और खुद सीखने की प्रवृत्ति कम हो रही है। बच्चों और युवाओं के बेहतर विकास के लिए AI के इस्तेमाल पर नियंत्रण जरूरी है।
-आदित्य गौतम, कॉलेज स्टूडेंट
AI का विरोध नहीं, समझदारी से इस्तेमाल जरूरी
AI आज बच्चों के जीवन का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। हर सवाल का जवाब तुरंत मिलने से उनकी रचनात्मकता, कल्पनाशक्ति और तार्किक क्षमता प्रभावित हो सकती है। बच्चों का वास्तविक विकास खुद सोचने, सवाल पूछने, गलतियों से सीखने और समाधान खोजने से होता है। इसलिए AI का विरोध करने के बजाय उसका संतुलित उपयोग जरूरी है। अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों को समझाना चाहिए कि AI उनकी मदद का साधन बने, उनकी सोच का विकल्प नहीं। भविष्य उन्हीं का होगा, जो AI का सही इस्तेमाल करना जानते होंगे और अपनी सोचने-समझने की क्षमता भी बनाए रखेंगे।
-दुष्यंत बैरवा, कॉलेज स्टूडेंट

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