पालनहार योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और खाद्य सुरक्षा योजना के प्रकरणों का निस्तारण होने पर ही लूंगा वेतन: अरुण कुमार
कलक्टर अरुण हसीजा का बड़ा फैसला, लंबित कार्य पूरा होने तक नहीं लेंगे वेतन
कलक्टर अरुण हसीजा ने जिले में लंबित पेंशन और पालनहार योजनाओं के निस्तारण तक अपना वेतन रोकने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
राजसमंद। अगर किसी को सुशासन, सेवा और सच्चे नेतृत्व का उदाहरण देखना हो, तो वो राजसमंद के कलक्टर अरुण कुमार हसीजा की ओर देख सकता है। उनका एक संकल्प आज प्रशासनिक हलके में चचार्ओं का विषय बना हुआ है। हसीजा ने अपनी जिम्मेदारी को इतना अहम माना कि उन्होंने यह घोषणा कर दी है कि जब तक जिले में पालनहार योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएसए) के सभी लंबित प्रकरणों का शत-प्रतिशत निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक वे खुद अपना वेतन नहीं लेंगे।
कदम प्रशासनिक ईमानदारी का प्रतीक
यह कदम न केवल प्रशासनिक ईमानदारी का प्रतीक है, बल्कि एक गहरी मानवीय संवेदनाओं से प्रेरित है। उन्होंने कहा, जब तक उस बच्चे को पालनहार योजना की राशि समय पर नहीं मिलती, जिसका पिता अब इस दुनिया में नहीं है, तब तक मैं खुद को एक जिम्मेदार अधिकारी नहीं मान सकता। इस कदम ने प्रशासनिक सेवा के सिद्धांतों को एक नए आयाम में ला खड़ा किया है, जहां अधिकारी सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि दिल से भी जनता की सेवा में तत्पर रहते हैं। हसीजा ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने इस फैसले से सिर्फ नतीजों का ही नहीं, बल्कि कार्यशैली का भी महत्व समझाया है।
पात्र लाभार्थियों को उनका हक दिलाने का संकल्प
28 जनवरी तक पालनहार सत्यापन का काम पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं, साथ ही बुजुर्गों, दिव्यांगों और एकल नारियों के पेंशन सत्यापन के कार्य को भी प्राथमिकता दी गई है। साथ ही, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र लाभार्थियों को इस महीने ही उनका हक दिलाने का संकल्प लिया गया है।
शत-प्रतिशत सत्यापन तक मत बनाना वेतन बिल
कलक्टर ने अधिकारियों को प्रेरित करने के लिए दंडात्मक कार्रवाई का रास्ता छोड़कर एक नया तरीका अपनाया है। उन्होंने कलक्ट्रेट के लेखाधिकारी को आदेश दिए हैं कि जब तक जिले के सभी एसडीएम अपने क्षेत्रों में शत-प्रतिशत सत्यापन का प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं करते, तब तक जनवरी का वेतन बिल तैयार नहीं किया जाए। रविवार को अवकाश के बावजूद, जिले का पूरा प्रशासनिक अमला, तहसीलदार और विकास अधिकारी मैदान में उतरे और अपनी जिम्मेदारी निभाने में जुट गए। यह दृढ़ संकल्प न केवल प्रशासनिक दुनिया के लिए एक उदाहरण है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा भी है।

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