100 साल बाद इस दिन लगेगा सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण, 6 मिनट 23 सेकंड तक धरती पर होगा अंधेरा

100 साल तक नहीं देख पाएंगे ऐसा नजारा

100 साल बाद इस दिन लगेगा सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण, 6 मिनट 23 सेकंड तक धरती पर होगा अंधेरा

दुनिया 2 अगस्त 2027 को 21वीं सदी के सबसे लंबे पूर्ण सूर्यग्रहण का साक्षी बनेगी। यह दुर्लभ घटना 6 मिनट 23 सेकंड तक चलेगी, जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक देगा। वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा लम्बा ग्रहण 100 साल में दोबारा देखना संभव नहीं होगा।

वॉशिंगटन। साल 2027 में एक दुनिया एक दुर्लभ पूर्ण सूर्यग्रहण का दीदार करने जा रही है, जिसे 21वीं सदी की होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक कहा जा रहा है। खगोल वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वालों ने अभी से ही इस तारीख की तैयारियां शुरू कर दी हैं। खगोलविदों का कहना है कि 2 अगस्त 2027 को अंतरिक्ष में पूर्ण सूर्यग्रहण का नजारा होगा। वैसे तो पूर्ण सूर्यग्रहण हर साल या फिर साल के अंतराल पर होता रहता है लेकिन अगस्त 2027 में होने वाला ग्रहण अपनी लंबी अवधि के लिए बहुत खास हो गया है। यह खगोलविदों को ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने के लिए एक मौका होगा।

2027 में होगी यह घटना

2 अगस्त 2027 का सूर्यग्रहण ऐसी घटना होगी जिसे पीढ़ियां याद रखेंगी। यह 21वें सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण होगा। नासा के अनुसार, इस दौरान प्रभावित इलाके 6 मिनट 23 सेकंड के लिए गहरे अंधेरे में डूब जाएंगे। इतने समय तक चंद्रमा सूर्य के कोरोना को पूरी तरह ढके रहेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि, इतना लंबा पूर्ण सूर्यगर्हण पिछली सदी में नहीं देखा गया था और इसे अगले 100 साल तक देखना संभव नहीं होगा।

पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य का कोरोना छिप जाने से दिन में शाम जैसा नजारा होगा। इस दौरान तापमान 5 से 10 डिग्री गिर सकता है। हवा की दिशा बदल सकती है। यह सूर्यग्रहण खगोलविदों के लिए अंतरिक्ष के रहस्यों को समझने का दुर्लभ अवसर भी होगा। आमतौर पर पूर्ण सूर्यग्रहण 3 मिनट से भी कम के होते हैं। ऐसे अगस्त 2027 में होने वाले ग्रहण की लंबी अवधि खगोलविदों को अंतरिण को देखने का दुर्लभ मौका देगा। स्पेस डॉटकॉम की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2114 तक इस लंबाई का पूर्ण सूर्यग्रहण नहीं देखा जा सकेगा।

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आखिर क्यों हो रहा लंबा सूर्यग्रहण?

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सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो सूर्य, चंद्रहणा और पृथ्वी के क्रमश: एक सीध में होने के चलते होती है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य के सामने आकार उसके प्रकाश में बाधा डालता है, जिसके परिणामस्वरूप धरती पर अंधेरा होने लगता है। 2 अगस्त 2027 को पृथ्वी सूर्य से अपने सबसे दूर बिंदु पर होगी। 

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इसके चलते सूर्य आकाश में छोटा नजर आएगा। लेकिन उसी समय चंद्रमा अपने परिक्रमा पथ पर बढ़ते हुए पृथ्वी के सबसे निकटतम बिंदु पर होगा, जिससे यह आकार में बड़ा दिखाई देगा। यह दुर्लभ संयोजन सूर्य के प्रकाश को अधिक समय तक रोकेगा, जो इस ग्रहण को लंबा बना देगा।

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