कंबल उद्योग पर महंगाई की मार, मांग 50% घटी; आखिर क्यों ठंडा पड़ा पानीपत का कारोबार?
गोदामों में अटके कंबल, फैक्ट्रियों की रफ्तार थमी…
पानीपत। देश के प्रमुख कंबल उत्पादन केंद्र पानीपत का उद्योग इस बार दोहरी मार झेल रहा है। विदेशी बाजारों में सुस्ती के बीच घरेलू मांग भी करीब 50 प्रतिशत घट गई है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और महंगाई ने हालात ऐसे कर दिए हैं कि पीक सीजन में भी कई फैक्ट्रियां अपनी क्षमता के महज एक-तिहाई पर चल रही हैं। उत्पादन में 30 से 35 प्रतिशत तक गिरावट आई है और गोदामों में बिना बिके कंबलों का भंडार बढ़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर पॉलिएस्टर धागे पर पड़ा है। पिछले साल 100 से 105 रुपए प्रति किलो मिलने वाला धागा अब करीब 155 रुपए तक पहुंच गया है। इससे उत्पादन लागत बढ़ने के साथ कंबलों की कीमतें भी बढ़ी हैं। सामान्य मिंक कंबलों का भाव 210 से 240 रुपए प्रति किलो हो गया है। पानीपत में करीब 160 विनिर्माण इकाइयां हैं, जो देश की घरेलू कंबल मांग का लगभग 99 प्रतिशत पूरा करती हैं। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, शादी-विवाह और त्योहारों में कमजोर बिक्री, प्रतिकूल मौसम तथा थोक विक्रेताओं की सतर्कता ने कारोबार को प्रभावित किया है।
पानीपत पोलर ब्लैंकेट एसोसिएशन के सचिव राम प्रताप गुप्ता ने बताया कि भुगतान मिलने में भी देरी हो रही है। पहले 35-40 दिन में मिलने वाला पैसा अब करीब दो महीने में मिल रहा है, जिससे नकदी संकट बढ़ा है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि मांग में सुधार और कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता नहीं आई तो इस सीजन में निर्माताओं की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

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