कोटा में किडनी फेल्योर से 12 दिन में चौथी प्रसूता की मौत, जेकेलोन अस्पताल में हुई थी डिलेवरी

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कोटा में किडनी फेल्योर से 12 दिन में चौथी प्रसूता की मौत, जेकेलोन अस्पताल में हुई थी डिलेवरी
कोटा के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले 12 दिनों में चार प्रसूताओं की मौत से मातृ सुरक्षा फिर से सवालों के घेरे में आई गई। ताजा मामला मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का है।

कोटा। कोटा के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले 12 दिनों में चार प्रसूताओं की मौत से मातृ सुरक्षा फिर से सवालों के घेरे में आई गई। ताजा मामला मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का है, जहां बारां जिले के शाहबाद निवासी 25 वर्षीय रेशू की मंगलवार तड़के मौत हो गई। रेशू को पहले जेकेलोन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसकी हालत गंभीर थी, किडनी काम नहीं कर रही थी और गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी थी।

जेके लोन में प्रसव कराने के बाद भी यूरिन आउटपुट नहीं हुआ तो सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने रात में ब्लड चढ़ाने के बाद तेज पेट दर्द और घबराहट की बात कही है।

गर्भ में ही बच्चे की मौत, यूरिन भी था बंद :

रेशू की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर शव बारां ले जाने के लिए नि:शुल्क एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया। मृतका के पिता धूली सिंह और अन्य परिजनों का कहना था कि जब मध्यप्रदेश तक नि:शुल्क एम्बुलेंस भेजी जा सकती है तो बारां के लिए सुविधा क्यों नहीं मिली। परिजनों के अनुसार, निजी एम्बुलेंसकर्मी शव ले जाने के लिए पैसे मांग रहे थे। उन्होंने सरकार से रेशू के दो छोटे बच्चों की परवरिश के लिए आर्थिक सहायता देने की मांग भी की।

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इससे पहले तीन की मौत :

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    25 अक्टूबर : जेकेलोन अस्पताल में बारां जिले के छबड़ा निवासी प्रसूता शबनम बानो (26) की मौत हो गई थी। 23 अक्टूबर को सीजेरियन से बच्ची का जन्म हुआ था।
    16 अक्टूबर : सिजेरियन के बाद किडनी फेल होने से प्रसूता रेशमा (40) की मौत हो गई थी।
    17 अक्टूबर : सिजेरियन के बाद अधिक रक्तस्त्राव होने कारण रोशन बैरवा की मौत हो गई थी।

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