कांग्रेस ने GDP आंकड़ों पर उठाए सवाल, सलमान सोज ने कहा- मजबूत अर्थव्यवस्था का दावा, फिर परिवार कर्ज लेने को मजबूर क्यों?
सांख्यिकीय कसरत से छिपाया जा रहा सच
नई दिल्ली। कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा है कि सरकार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों का जश्न मना रही है लेकिन यदि अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है तो उसका असर आम लोगों की जिंदगी में क्यों दिखाई नहीं दे रहा है। कांग्रेस के मीडिया पैनलिस्ट सलमान सोज ने मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यदि अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है तो परिवारों को अपने खर्च के लिए कर्ज क्यों लेना पड़ रहा है, पिछले एक दशक में ग्रामीण मजदूरी महंगाई की तुलना में मामूली रूप से ही क्यों बढ़ी है और निजी निवेश स्थिर क्यों है। उन्होंने कहा कि जनता केवल आंकड़ों पर विश्वास नहीं करती, बल्कि यह जानना चाहती है कि अर्थव्यवस्था की कथित मजबूती का लाभ जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा है।
सलमान सोज ने सवाल किया कि देश में जीडीपी के हिस्से के रूप में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) शून्य क्यों है और युवाओं में बेरोजगारी दर 16 प्रतिशत क्यों बनी हुई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 250 लाख करोड़ रुपये निकाले जा चुके हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है तो निर्यात में उसकी हिस्सेदारी पहले के मुकाबले इतनी कम क्यों है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जब डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 58 रुपये था, तब भारतीय जनता पार्टी के नेता कहते थे कि रुपया 'वेंटिलेटर' पर है, लेकिन आज रुपया करीब 95 रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि देश के लोगों को केवल आर्थिक आंकड़ों से संतुष्ट नहीं किया जा सकता। जनता यह जानना चाहती है कि यदि अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है तो उसका असर जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा है। देश में अभी भी बहुत समस्याएं हैं और भविष्य में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं लेकिन सरकार इससे बेखबर है और केवल आंकड़ों को बेचने में लगी है।
इस बीच, कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि जीडीपी के आंकड़े महज ‘सांख्यिकीय कसरत’ है और सरकार बार-बार पद्धति बदलकर जीडीपी आंकड़ों को अपने हिसाब से तय कर रही है और देश की खराब आर्थिक वास्तविकता को छिपा रही है। उनका कहना था कि नाममात्र और वास्तविक जीडीपी के बीच का अंतर महंगाई को दर्शाता है और सरकार के अनुसार यह अंतर केवल 2.3 प्रतिशत है, जबकि इस तिमाही में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई नौ प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने इसे स्पष्ट विसंगति बताते हुए आरोप लगाया कि यह स्थिति सरकार ने गणना की पद्धति में बदलाव कर पैदा की है। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ ने बहुत कम हासिल किया है लेकिन सरकार की प्रमुख ‘फेक इन इंडिया’ योजना बेरोकटोक जारी है।

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