मुहर्रम से पहले महबूबा मुफ्ती की अपील, PSA के तहत हिरासत में लिए गए युवाओं को तुरंत रिहा करे प्रशासन
बातचीत से समाधान निकालने का आग्रह
श्रीनगर। मुहर्रम का महीना शुरू होने जा रहा है। इस मौके पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को प्रशासन से अपील की, कि जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में लिए गए युवाओं को तुरंत रिहा किया जाए। साथ ही उन्होंने इस पवित्र महीने को शांतिपूर्वक मनाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम करने की भी मांग की। एक बयान में महबूबा ने कहा कि मुहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का एक अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को मुहर्रम के जुलूसों और मजलिसों में शामिल होने वाले लोगों के लिए यातायात व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, साफ-सफाई, पीने का पानी, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए।
ईरान की हाल की घटनाक्रमों को लेकर हुए प्रदर्शनों में शामिल कई युवाओं को पीएसए के तहत मामला दर्ज कर जम्मू-कश्मीर से बाहर की जेलों में बंद किए जाने की खबरों पर उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने इस कदम को 'बेहद परेशान करने वाला' बताते हुए चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाइयों से युवाओं में नाराजगी और दूरी और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि युवाओं के खिलाफ ऐसे सख्त कानूनों का इस्तेमाल करना, खासकर मुहर्रम के पवित्र महीने के दौरान, असंवेदनशील और नुकसानदेह है।
महबूबा ने कहा, "मुहर्रम वह समय है जब लोग कर्बला की कुर्बानियों को याद करते हुए शोक मनाते हैं। यह आत्मनिरीक्षण, सहानुभूति और पीड़ितों के प्रति एकजुटता दिखाने का समय है। ऐसे संवेदनशील वक्त में सरकार को लोगों से बात करनी चाहिए, उनकी चिंताओं को सुनना चाहिए और उनके जख्मों पर मरहम लगाना चाहिए, न कि दंडात्मक कार्रवाई करके उनका दर्द बढ़ाना चाहिए।" पीडीपी नेता ने प्रशासन से इन सभी मामलों की तुरंत समीक्षा करने, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने और आगे ऐसी सख्त कार्रवाई न करने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता की भावनाओं और शिकायतों को दूर करने का सबसे सही तरीका बातचीत है।
इसके साथ ही महबूबा ने आशुरा के जुलूसों और मुहर्रम की पारंपरिक रस्मों को सम्मानजनक और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने की अनुमति देने की भी मांग की। एकता और धैर्य की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि न्याय, बलिदान और मानवीय सम्मान के जो मूल्य इमाम हुसैन ने सिखाए हैं, वे आज भी पीढ़ियों को प्रेरित कर रहे हैं।

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