उमर अब्दुल्ला मंत्रिमंडल का विस्तार, नेकां के चार विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लोक भवन में दिलाई पद एवं गोपनीयता की शपथ
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल का पहला विस्तार किया। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के चार विधायकों अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी उर्फ कल्लू ने मंत्री पद की शपथ ली। चारों मंत्री कश्मीर घाटी से हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में जम्मू-कश्मीर मंत्रिपरिषद में शामिल किए गये नये मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी। इस अवसर पर अब्दुल्ला भी मौजूद थे।
समारोह में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी, मंत्री सकीना मसूद इटू, जावेद अहमद राणा और जाविद अहमद डार, सांसद गुरविंदर सिंह ओबेरॉय सहित कई गणमान्य व्यक्ति और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्रिमंडल में शामिल किए गये नये मंत्रियों में श्रीनगर के खानयार से विधायक अली मोहम्मद सागर, त्रेहगाम से विधायक मीर सैफुल्ला, पहलगाम से विधायक अल्ताफ अहमद कल्लू और श्रीनगर के हब्बाकदल से विधायक शमीमा फिरदौस शामिल हैं। गौरतलब है कि सागर और सैफुल्ला इससे पहले वर्ष 2008 से 2014 तक श्री अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
इन चार विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करने और सतीश शर्मा को मंत्री पद से हटाए जाने के बाद अब मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद में कुल नौ सदस्य हो गए हैं, जो निर्धारित अधिकतम सीमा है। अब्दुल्ला ने निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिपरिषद से हटा दिया है। इसके साथ ही जम्मू क्षेत्र के मैदानी हिस्से का मंत्रिमंडल में कोई प्रतिनिधित्व नहीं रह गया है। शर्मा के पास खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, परिवहन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, युवा सेवाएं एवं खेल तथा एआरआई और प्रशिक्षण विभागों का प्रभार था। जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार के गठन के दो साल से अधिक समय बाद मंत्रिमंडल का यह विस्तार हुआ है। संवैधानिक प्रावधानों के तहत, 90 सदस्यीय विधानसभा वाले जम्मू-कश्मीर में मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम नौ सदस्य हो सकते हैं।
नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा, मंत्रिमंडल में फेरबदल बहुत अच्छा कदम है। इन लोगों को काम करने और जनता की समस्याओं को कम करने के लिए प्रयास करने का अवसर मिलेगा। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर नेकां के कुछ नेताओं में हालांकि, नाराजगी भी देखने को मिली। पार्टी के वरिष्ठ नेता मुबारक गुल ने मंत्रिमंडल विस्तार में जगह नहीं मिलने पर सार्वजनिक रूप से निराशा जताई। गुल ने श्रीनगर के लोक भवन के बाहर पत्रकारों से कहा, मैं अब तक 30 शपथ ग्रहण समारोहों में शामिल हो चुका हूं। हर बार मुझे मंत्रिमंडल से बाहर रखा गया और आज भी मुझे बाहर ही रखा गया है। गुल के समर्थकों ने पार्टी मुख्यालय में विरोध प्रदर्शन भी किया। उनके सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताने के तुरंत बाद नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने उनसे संपर्क किया और उन्हें पार्टी का नया महासचिव मनोनीत कर दिया। पार्टी के एक अन्य विधायक अब्दुल मजीद लर्मी ने भी मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल नहीं किए जाने पर निराशा जताई।

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