Karnataka SIR : 52 चुनाव क्षेत्रों में 127 मतदाता 'गैर-भारतीय नागरिक' के रूप में चिह्नित, आवेदनों की पारदर्शिता पर सवाल
बिना स्पष्ट कारण बताए 61,000 से अधिक नाम हटाने के आवेदन दाखिल
बेंगलुरु। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान 52 विधानसभा क्षेत्रों में 127 मतदाताओं को 'गैर-भारतीय नागरिक' के रूप में चिह्नित किया गया है। राजनीतिक अनुसंधान संस्था 'संकल्प' के जारी आंकड़ों से यह बात सामने आई है। इस बीच, राज्य में मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और आवेदनों की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। ये आंकड़े राज्य की मतदाता सूची से नाम हटाने की मांग करने वाले आवेदनों की पारदर्शिता और प्रक्रियात्मक अनुपालन पर उठ रहे सवालों के बीच सामने आए हैं।
हेब्बल में इस श्रेणी के तहत सबसे अधिक 13 मतदाताओं को चिह्नित किया गया है, जिसके बाद पद्मनाभनगर में 10, शिवाजीनगर में आठ और महादेवपुरा में सात मामले दर्ज किए गए। चित्तापुर, ब्याटरायनपुरा और राजराजेश्वरीनगर में पांच-पांच मामले दर्ज हुए, जबकि होन्नाली में चार प्रविष्टियां दर्ज की गईं। बीजापुर सिटी, सेडम, तीर्थहल्ली, सिरा, चिकपेट, अनेकल, मलावल्ली और मेलुकोट में तीन-तीन मामले सामने आए। कई अन्य चुनाव क्षेत्रों में एक या दो प्रविष्टियां दर्ज की गईं।
आंकड़ों से पता चलता है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान नाम हटाने के लिए जमा किए गए आवेदनों की बड़ी संख्या की तुलना में विशेष रूप से गैर-नागरिक के रूप में चिह्नित मतदाताओं की संख्या सीमित है। केवल यह वर्गीकरण हालांकि किसी भी व्यक्ति की राष्ट्रीयता या आप्रवासन स्थिति को स्थापित नहीं करता है। फॉर्म-7 आवेदनों के निपटारे को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं, जिनका उपयोग मतदाता सूची से नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है।
रिपोर्टों के अनुसार, निर्धारित तरीके से आपत्तियां जमा करने की आवश्यकता के बावजूद, प्रस्तावित नाम हटाने के कारणों को दर्ज किए बिना चुनाव अधिकारियों ने कम से कम 61,059 ऐसे आवेदन दाखिल किए थे। मैपिंग मुद्दों या तार्किक विसंगतियों से संबंधित सुनवाई के दौरान मतदाताओं से संपर्क न हो पाने पर ये आवेदन अपने आप जेनरेट हो गए थे। अधिकारियों ने कहा कि इस प्रक्रिया में स्थान परिवर्तन करने वाले मतदाताओं, दोहरी प्रविष्टियों, कम उम्र के मतदाताओं, मृतक व्यक्तियों या गैर-नागरिक माने गए व्यक्तियों के मामले शामिल थे। 23 सितंबर को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि समाप्त होने के बाद फॉर्म-7 के आवेदनों की संख्या में भारी उछाल आया है, जहां 24 अगस्त से 23 सितंबर के बीच 192 आवेदन प्राप्त हुए थे, वहीं 24 सितंबर से 22 अक्टूबर के बीच 60,800 से अधिक आवेदन दाखिल किए गए।
दावों और आपत्तियों के निपटारे के अंतिम दिन 22 अक्टूबर को चुनाव अधिकारियों ने 10,105 आवेदन दाखिल किए। वहीं 21 अक्टूबर को 10,314 अन्य आवेदन दाखिल किए गए, जबकि 17 और 19 अक्टूबर को क्रमशः 11,132 और 11,760 आवेदन जमा किए गए थे। नमूना जांच में पाया गया कि जिन मतदाताओं के खिलाफ आवेदन दाखिल किए गए थे, उनके नाम पहले ही मतदाता सूची से हटा दिए गए थे, जिनमें समय सीमा के बाद जमा किए गए आवेदनों के मामले भी शामिल हैं।
कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के जारी आंकड़ों और चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध समेकित फॉर्म-10 के रिकॉर्ड के बीच भी अंतर की बात सामने आई है। सीईओ कार्यालय ने 24 सितंबर से 22 अक्टूबर के बीच 1,70,442 फॉर्म-7 आवेदनों की रिपोर्ट दी थी, जबकि समेकित रिकॉर्ड में यह संख्या 1,56,634 दर्ज थी, यानी 13,808 का अंतर था। एसआईआर प्रक्रिया के तहत कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची मंगलवार को जारी होने वाली है।
इस प्रक्रिया के शुरू होने से पहले, 16 जून 2026 तक राज्य में 5,54,32,314 मतदाता थे। इनमें से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृतक, दोहरी प्रविष्टि और अन्य निर्दिष्ट श्रेणियों के तहत 1,07,96,339 मतदाताओं की पहचान की गई थी। 24 अगस्त को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में 4,46,35,975 मतदाता शामिल थे। चुनाव आयोग ने मतदाताओं के ब्यौरे में तार्किक विसंगतियों और मैपिंग से जुड़ी समस्याओं को लेकर 43,82,824 नोटिस भी जारी किए थे। इन निष्कर्षों ने मतदाता सूची से नाम हटाने का प्रस्ताव रखते समय पारदर्शी प्रक्रियाओं और उचित दस्तावेजों की आवश्यकता की ओर ध्यान फिर से आकर्षित किया है।

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