कर्नाटक में स्टिंग ऑपरेशन पर सियासी संग्राम, कुमारस्वामी का अल्टीमेटम- विजयादशमी तक गिरफ्तारी नहीं तो राज्यव्यापी प्रदर्शन
वॉयस सैंपल वेरिफिकेशन की मांग
बेंगलुरु। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और अन्य मंत्रियों को निशाना बनाने के लिए कथित स्टिंग ऑपरेशन की साजिश रची थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि यदि विजयदशमी तक मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। कुमारस्वामी ने कहा, स्टिंग ऑपरेशन मामले में मुख्य आरोपियों को विजयदशमी तक गिरफ्तार किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर कर्नाटक के सभी पुलिस थानों के सामने विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया है कि कथित स्टिंग ऑपरेशन का उद्देश्य सिद्दारमैया की छवि धूमिल करना और राज्य के राजनीतिक नेतृत्व को प्रभावित करना था। उन्होंने इस विवाद पर सिद्दारमैया की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री की राजनीतिक हैसियत को कमजोर किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने यह चेतावनी 17 अक्टूबर को बेंगलुरु में जनता दल (सेक्युलर) की ओर से किये गये विरोध प्रदर्शन के बाद दी है। इस प्रदर्शन में कुमारस्वामी और पार्टी के अन्य नेताओं ने कथित स्टिंग ऑपरेशन में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की मांग की थी।
जद (एस) मुख्यालय जेपी भवन से शुरू हुआ यह मार्च फ्रीडम पार्क की ओर बढ़ रहा था, लेकिन पुलिस ने बैरिकेड लगाकर इसे रोक दिया। इसके बाद कुमारस्वामी ने एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए पुलिस महानिदेशक एम.ए. सलीम से मुलाकात की और मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर शिकायत सौंपी। कुमारस्वामी ने इस विवाद की जांच के दायरे में राकेश शेट्टी, बागेपल्ली प्रशांत और कांग्रेस नेता कृपा अल्वा के नाम भी लिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग इस विवाद में शामिल हैं और उनके खिलाफ जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता स्थापित करने के लिए उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने और संबंधित लोगों के आवाज के नमूने की पुष्टि कराने की मांग की है। उन्होंने अधिकारियों पर जद (एस) के सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया, जबकि उनके अनुसार, कथित स्टिंग ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। कुमारस्वामी ने जांचकर्ताओं को उन्हें पूछताछ के लिए बुलाने की चुनौती देते हुए कथित राजनीतिक साजिश की विस्तृत जांच की मांग की है।
शिवकुमार ने कहा है कि जांच गृह विभाग को सौंप दी गयी है। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। कांग्रेस ने भी कुमारस्वामी के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, कर्नाटक मंत्रिमंडल में इस विवाद पर चर्चा हुई है, लेकिन अलग से विशेष जांच दल (एसआईटी) जांच का आदेश नहीं दिया गया है। सिद्दारमैया ने कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े वीडियो प्रसारित किए जाने के मामले में बेंगलुरु की एक अदालत का रुख किया है। अदालत ने अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करते हुए 42 मीडिया संगठनों और डिजिटल मंचों को दो वीडियो तथा उनसे संबंधित सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से रोक दिया है।
इस विवाद के कारण कांग्रेस के भीतर मतभेदों और कर्नाटक में पार्टी के नेतृत्व पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, सिद्दारमैया की छवि धूमिल करने या उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए साजिश रचे जाने के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। कुमारस्वामी ने चेतावनी दी है कि विजयादशमी तक मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर कर्नाटक के सभी पुलिस थानों के बाहर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। इस मामले में अब भी कई अहम सवाल अनसुलझे हैं। इनमें यह शामिल है कि कथित स्टिंग ऑपरेशन किसके कहने पर और किसने अंजाम दिया, वीडियो कैसे हासिल किए गए और उन्हें कैसे प्रसारित किया गया तथा क्या इस सामग्री का उद्देश्य राज्य के राजनीतिक नेतृत्व को प्रभावित करना था। इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं। जांच की मौजूदा स्थिति की भी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

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