फॉर्म-7 विवाद: खड़गे ने थोक आवेदनों को लेकर राजग नेताओं से पूछे सवाल, बोले- राजनीतिक दल के आधिकारिक लेटरहेड पर क्यों किया जा रहा जमा ?
सीईओ और राज्यपाल को स्थिति करें स्पष्ट
बेंगलुरु। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के दुरुपयोग मामले में दर्ज प्राथमिकियों पर आपत्ति जताने वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक (राजग) नेताओं से मंगलवार को सवाल किया कि वे बताएं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में नाम कटवाने के लिए आवेदन क्यों दिए जा रहे हैं। मुद्दे पर राजग नेताओं के राज्यपाल के पास जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए खरगे ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-7 भरना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन जिन मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है, उन्हें भी अपना पक्ष रखने और शिकायत दर्ज कराने का पूरा हक है।
उन्होंने सवाल किया, फॉर्म-7 देना आपका अधिकार है, लेकिन अगर झूठी जानकारी देकर किसी असली मतदाता का नाम हटाया जा रहा है, तो क्या उस मतदाता को अपना बचाव करने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का संवैधानिक अधिकार नहीं है? इतनी बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा कराने पर आपत्ति जताते हुए खरगे ने विपक्षी नेताओं से जवाब मांगा कि आखिर किस आधार पर ये आवेदन दाखिल किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, 5,000, 7,000 या हजारों की संख्या में फॉर्म-7 आवेदन क्यों सौंपे जा रहे हैं? इन्हें राजनीतिक दल के आधिकारिक लेटरहेड पर क्यों जमा किया जा रहा है? राजग नेता जनता के सामने स्पष्ट करें कि वे कितने आवेदन जमा कर रहे हैं और इसके पीछे की वजह क्या है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की सच्चाई राज्यपाल के साथ-साथ मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) को भी बतायी जानी चाहिए। गृह मंत्री ने चुटकी लेते हुए पूछा, वे राज्यपाल को भी समझाएं और मुख्य चुनाव अधिकारी को भी स्थिति स्पष्ट करें। वे आखिर चाहते क्या हैं? क्या वे जो चाहें मनमानी कर सकते हैं?
खरगे ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि केवल फॉर्म-7 जमा करना ही अंतिम संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा, हां, फॉर्म-7 देना आपका अधिकार है, लेकिन अगर कोई वैध मतदाता है और गलत जानकारी देकर उसका नाम काटने की कोशिश हो रही है, तो आपत्ति जताना भी उसका संवैधानिक अधिकार है। अगर कोई नागरिक कहे कि 'मैं जीवित हूं, मेरा नाम क्यों हटाया जा रहा है?' तो क्या उसकी शिकायत दर्ज करना गलत है?
यह बयान मतदाता सूची से नाम हटाने वाले फॉर्म-7 के थोक आवेदनों को लेकर सत्ताधारी कांग्रेस और राजग के बीच गहराते राजनीतिक विवाद के बीच आया है। खरगे ने कहा कि राजनीतिक दलों को निर्धारित चुनावी प्रक्रिया के तहत आपत्तियां दर्ज कराने का पूरा अधिकार है, लेकिन पहले हजारों आवेदन थोक में जमा करना और फिर बाद में उन्हें वापस लेने की मांग करना समझ से परे है।
उन्होंने पार्टी लेटरहेड पर जमा किए गए आवेदनों पर राजग नेतृत्व से जवाब मांगा और थोक में आवेदन सौंपने के वास्तविक मकसद को साफ करने के लिए कहा। इस मुद्दे ने कांग्रेस और विपक्ष के बीच तीखा राजनीतिक रुख अख्तियार कर लिया है। एक तरफ राजग नेता प्राथमिकियों के खिलाफ राज्यपाल के पास पहुंचे हैं, तो वहीं सरकार का रुख है कि मतदाता सूची में हेरफेर और धांधली की हर शिकायत से कानून के मुताबिक ही निपटा जाएगा।

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