दीपावली की मिठास में घुला चुनावी स्वाद, बधाइयों के बहाने वोटरों पर डोरे! पंचायत चुनाव से पहले गांव-गांव सक्रिय हुए दावेदार, सोशल मीडिया पर पोस्टर और संदेशों की बाढ़
नवंबर में विभिन्न चरणों में प्रस्तावित मतदान को लेकर तैयारियां तेज
जयपुर। प्रदेश में पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही त्योहारों का रंग भी सियासी होने लगा है। दीपावली की मिठास के बीच संभावित प्रत्याशियों ने मतदाताओं को साधने की तैयारी तेज कर दी है। कोई सोशल मीडिया पर शुभकामना संदेशों के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है, तो कोई घर-घर पहुंचकर रिश्तों की डोर मजबूत करने में जुटा है। मकसद साफ है—त्योहार की बधाई भी हो जाए और चुनाव से पहले मतदाताओं के बीच पहचान भी बन जाए। नवरात्र में मेल-मुलाकातों के बाद अब दशहरा और दीपावली संभावित प्रत्याशियों के लिए जनसंपर्क का नया मौका बनकर आए हैं। गांवों से लेकर वार्डों तक चुनावी चर्चाएं तेज हैं। दीपावली के पोस्टरों में नाम और तस्वीरें नजर आने लगी हैं। शुभकामनाओं के इन संदेशों के बीच चुनावी उम्मीदें भी छिपी हैं।
रिश्तों की मिठास के साथ सियासी गुणा-भाग
पहले त्योहारों पर बधाई का दायरा रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों तक सीमित रहता था। अब पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे दावेदार इस दायरे को गांव और वार्ड के मतदाताओं तक बढ़ा रहे हैं। फोन कॉल, व्यक्तिगत संदेश और घरों तक पहुंचकर शुभकामनाएं देने की कवायद चल रही है। त्योहार के बहाने लोगों से संपर्क बढ़ाने और अपनी दावेदारी का अहसास कराने की कोशिश की जा रही है।
सोशल मीडिया पर बधाइयों की सियासत
मोबाइल और सोशल मीडिया ने चुनावी बधाइयों को नया मंच दे दिया है। दीपावली और अन्य त्योहारों के नाम पर आकर्षक पोस्टर तैयार किए जा रहे हैं। इनमें संभावित प्रत्याशियों की तस्वीरों के साथ उनके नाम और शुभकामना संदेश प्रमुखता से शामिल हैं। एक ही संदेश से बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचने की सुविधा ने डिजिटल प्रचार को दावेदारों के लिए अहम बना दिया है।
चुनावी कैलेंडर ने बढ़ाई हलचल
राजस्थान के सभी 41 जिलों में जिला परिषद के 1403 वार्ड, आठ पंचायत समितियों के 8245 सदस्य और 14403 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के चुनाव होने हैं। इनके साथ ही 130589 वार्ड पंच भी चुने जाएंगे। इतने बड़े चुनावी मैदान में अपनी जगह बनाने के लिए संभावित प्रत्याशियों के पास त्योहारों के दौरान जनसंपर्क बढ़ाने का मौका है। हालांकि, शुभकामना संदेशों और मुलाकातों का मतदाताओं पर कितना असर पड़ेगा, यह चुनाव के नतीजे ही बताएंगे।
त्योहारों के बीच मतदान की तारीखें
त्योहारों की रौनक और चुनावी सरगर्मी के इस मेल में संभावित प्रत्याशियों के लिए हर मुलाकात अहम हो गई है। अब देखना यह है कि दीपावली की शुभकामनाएं मतदाताओं के दिल तक पहुंचती हैं या चुनावी मैदान में दावेदारों को अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए और मेहनत करनी पड़ती है।

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