अब मनमाने ढंग से नहीं लगेगी अपराध की धाराएं, चालान से पहले साक्ष्यों की पड़ताल होगी जरूरी
कमियां दूर होने के बाद ही कोर्ट में पेश होगा आरोप पत्र
जयपुर। राजस्थान पुलिस में अब किसी भी मामले में आरोप पत्र (चालान) या अंतिम रिपोर्ट पेश करने से पहले साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों की गहन समीक्षा करनी होगी। केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए चालान पेश करने या साक्ष्यों के अनुरूप कानूनी धाराएं नहीं लगाने पर संबंधित थानाधिकारी की जवाबदेही तय होगी। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस अपराध विपिन पाण्डेय ने इस संबंध में एसओपी जारी की है। थानाधिकारियों को केस डायरी, गवाहों के बयान, मेडिकल और विशेषज्ञ रिपोर्ट सहित पूरे अनुसंधान का परीक्षण कर स्वतंत्र कानूनी राय कायम करनी होगी।
केस डायरी की नियमित समीक्षा :
थानाधिकारी हर प्रकरण की केस डायरी की नियमित समीक्षा करेंगे। अनुसंधान के दौरान आवश्यक कमियां मिलने पर जांच अधिकारी को लिखित निर्देश देकर उनकी पूर्ति करानी होगी। थानाधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि जांच निष्पक्ष, शीघ्र, साक्ष्य आधारित और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप पूरी हो।
वृत्ताधिकारी से एसपी तक होगी निगरानी :
एसओपी की पालना सुनिश्चित करने के लिए वृत्ताधिकारी निरीक्षण और मासिक समीक्षा के दौरान पेश किए गए आरोप पत्रों की नमूना जांच होंगी। इसमें कानूनी धाराओं के चयन और निर्धारित प्रमाण-पत्रों व दस्तावेजों की उपलब्धता की समीक्षा होगी।
एफआईआर से मेडिकल और एफएसएल रिपोर्ट तक का परीक्षण :
न्यायालय में आरोप पत्र या अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने से पहले पूरी पत्रावली का परीक्षण अनिवार्य होगा। इसमें एफआईआर, गवाहों के बयान, विभिन्न फर्द, मौका नक्शा और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच होगी। चोट प्रतिवेदन, एक्स-रे, पोस्टमार्टम, एफएसएल तथा चिकित्सा एवं विशेषज्ञ राय से जुड़े आवश्यक अभिलेख नियमानुसार संलग्न होने चाहिए।
साक्ष्यों के आधार पर तय होंगी कानूनी धाराएं :
अपराध की प्रकृति के अनुरूप ही कानूनी धाराएं लगाई जाएं। चोट प्रतिवेदन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विशेषज्ञ राय के आधार पर अपराध की गंभीरता का आकलन करना होगा। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों से जो अपराध बनता है, आरोप पत्र में उससे संबंधित धाराएं शामिल करना अनिवार्य होगा।
कमी मिलने पर पहले पूर्ति, फिर आरोप पत्र :
बीएनएसएस 2023 की धारा 193 के प्रावधानों के अनुरूप अंतिम परिणाम प्रपत्र में आवश्यक तथ्यों, दस्तावेजों और साक्ष्यों का उल्लेख करना होगा। पत्रावली में कोई कमी मिलने पर थानाधिकारी अनुसंधान अधिकारी को लिखित निर्देश देकर उसे दूर करवाएंगे।

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