जयपुर में गोबर के 10 लाख दीपक बिके, रोजाना बन रहे 10 हजार
₹3 से ₹10 तक कीमत
जयपुर। दीपावली पर गाय के गोबर से बने दीपक जयपुर के लिए स्वदेशी कारोबार और महिला रोजगार का नया माध्यम बन रहे हैं। टोंक रोड स्थित सांगानेर की श्री पिंजरापोल गौशाला में अब तक करीब 10 लाख दीपकों का उत्पादन किया जा चुका है और तैयार दीपक बिक चुके हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए प्रतिदिन करीब 10 हजार दीपक बनाए जा रहे हैं। इनकी आपूर्ति मॉरीशस सहित देश के विभिन्न राज्यों में की जा रही है।
अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक एवं ऑर्गेनिक गुरु डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य गोबर से उपयोगी उत्पाद तैयार कर गौशालाओं की आय बढ़ाना और स्वदेशी उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना है। दीपकों की कीमत 3 से 10 रुपये प्रति नग रखी गई है। उत्तर प्रदेश और मॉरीशस में बड़ी खेप भेजी गई है, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र से भी ऑर्डर मिले हैं।
महिलाओं को रोजगार, कुटीर उद्योग को बढ़ावा :
दीपकों के निर्माण और पैकेजिंग में महिलाओं को रोजगार दिया जा रहा है। परिषद की अंतरराष्ट्रीय सह-संयोजक एवं हैनीमैन चैरिटेबल मिशन सोसाइटी की सचिव मोनिका गुप्ता ने बताया कि गोबर आधारित कुटीर उद्योग ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को रोजगार देने के साथ उन्हें उद्यमी बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। गोबर से दीपकों के अलावा जैविक खाद, धूपबत्ती और गमले जैसे उत्पाद तैयार करने की संभावनाएं भी हैं।
4,000 गौशालाओं तक विस्तार की योजना :
डॉ. गुप्ता के अनुसार, परिषद से जुड़ी करीब 4,000 गौशालाओं के नेटवर्क के माध्यम से गोबर आधारित उत्पादों के निर्माण, प्रशिक्षण और विपणन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे गौशालाओं के लिए आय के नए स्रोत विकसित होंगे और ग्रामीण उद्योगों को मजबूती मिलेगी। मोनिका गुप्ता ने लोगों और व्यापारिक संगठनों से स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित स्वदेशी उत्पाद खरीदने की अपील की।

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