उर्वरकों की कालाबाजारी और किसानों के आर्थिक शोषण की उच्चस्तरीय जांच हो : दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह का सीएम मोहन यादव को पत्र

उर्वरकों की कालाबाजारी और किसानों के आर्थिक शोषण की उच्चस्तरीय जांच हो : दिग्विजय सिंह
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश में खाद और उर्वरकों की एमआरपी से अधिक दामों पर बिक्री पर गहरी चिंता जताई है। सीएम मोहन यादव को लिखे पत्र में उन्होंने पुराने स्टॉक को नई बढ़ी कीमतों पर बेचने का आरोप लगाते हुए किसानों से हुई अतिरिक्त वसूली वापस कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने प्रदेश में डीएपी, एसएसपी तथा विभिन्न कॉम्प्लेक्स उर्वरकों के वितरण और बिक्री में कथित अनियमितताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से उच्चस्तरीय जांच कराने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से किसानों और किसान संगठनों की ओर से शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि सहकारी समितियों, विपणन संस्थाओं तथा निजी विक्रेताओं के माध्यम से उर्वरकों की बिक्री मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दरों पर की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने स्टॉक में उपलब्ध उर्वरकों को भी पीओएस और ई-टोकन प्रणाली में प्रदर्शित नई तथा बढ़ी हुई दरों पर बेचा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 20:20:0:13 उर्वरक की 50 किलोग्राम की एक बोरी, जिसकी पूर्व निर्धारित कीमत लगभग 1450 रुपये थी, उसे कई स्थानों पर 2100 रुपये तक में बेचे जाने की शिकायतें मिली हैं। इससे किसानों पर प्रति बोरी लगभग 650 रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसी प्रकार एसएसपी तथा अन्य उर्वरकों के संबंध में भी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। सिंह ने कहा कि यह मामला केवल मूल्य वृद्धि का नहीं, बल्कि किसानों के उपभोक्ता अधिकारों, पारदर्शिता और कानून के संभावित उल्लंघन से भी जुड़ा है। उन्होंने उल्लेख किया कि उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अनुसार किसी भी उर्वरक की बिक्री उसके मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक दर पर नहीं की जा सकती।

उन्होंने मांग की कि प्रदेशभर में उर्वरक वितरण एवं विक्रय व्यवस्था की विशेष और स्वतंत्र जांच कराई जाए, पुराने स्टॉक पर नई दरों की वसूली संबंधी शिकायतों की जिला स्तर पर जांच हो, किसानों से अधिक वसूली गई राशि वापस कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है और किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ऐसे समय में जब किसान बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाओं और बाजार की अनिश्चितताओं का सामना कर रहे हैं, तब उर्वरकों की कीमतों और वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों के हितों की रक्षा के लिए त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

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