संरक्षणवाद और अनिश्चितता से निटपने के लिए नीतिगत दरों में हो आधी फीसदी की कमी, 4 जून को शुरू होगी रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की बैठक

चीन की रीडिंग नकारात्मक 

संरक्षणवाद और अनिश्चितता से निटपने के लिए नीतिगत दरों में हो आधी फीसदी की कमी, 4 जून को शुरू होगी रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की बैठक

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) से नीतिगत दरों में आधी फीसदी की कटौती करने की उम्मीद की जा रही है। 

नई दिल्ली। बढ़ते संरक्षणवाद और भू-राजनीतिक तनाव से उत्पन्न चुनौतियों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में आ रही सुस्ती को ध्यान में रखते हुए घेरलू स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और निर्यात को गति देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) से नीतिगत दरों में आधी फीसदी की कटौती करने की उम्मीद की जा रही है। 

उल्लेखनीय है कि मई 2022 के बाद फरवरी 2025 में नीतिगत दरों में 0.25 प्रतिशत और अप्रैल 2025 में फिर से 0.25 प्रतिशत की कमी की गयी है। इन दो कटौतियों से आम लोगों विशेषकर आवास ऋण और नए व्यक्तिगत ऋण, वाहन ऋण लेने वालों को राहत मिली है क्योंकि बैंकों ने कटौतियों के लाभ को ग्राहकों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है। यदि जून की बैक में भी आधी फीसद की कमी की जाती है तो कुल मिलाकर नीतिगत दरों में एक प्रतिशत की कटौती हो जायेगी, जिससे आवासऋण आदि की मांग में तेजी आ सकती है।  

प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट :

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बढ़ते व्यापार संरक्षणवाद और अनिश्चितता के कारण 50 आधार अंकों की गिरावट का अनुमान है। सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट का अनुमान है। 2025 में चीन की वृद्धि 130 आधार अंकों और भारत की 20-30 आधार अंकों की गिरावट का अनुमान है। 

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चीन की रीडिंग नकारात्मक :

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वैश्विक प्रमुख मुद्रास्फीति में अपेक्षा से कम गति से कमी आने की उम्मीद है। उभरती अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति में नरमी आने की उम्मीद है, चीन के लिए नवीनतम रीडिंग नकारात्मक मुद्रास्फीति का संकेत दे रही है। व्यापार युद्धों ने अमेरिकी राजकोषीय घाटे पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं डाला है।

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सामान्य से अधिक मॉनसून की भविष्यवाणी :

घरेलू स्तर पर भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। मौसम विभाग द्वारा सामान्य से अधिक मॉनसून की भविष्यवाणी, फसलों की मजबूत आवक और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई अनुमान को वित्त वर्ष 2026 में 3.5 प्रतिशत तक आने का अनुमान जताया गया है लेकिन अभी इसमें और कमी आने की उम्मीद की जा रही है।  

भू-राजनीतिक जोखिम उच्च बना : घोष

16वें वित्त आयोग के सदस्य एवं भारतीय स्टेट बैंक के ग्रुप मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष ने यह उम्मीद जातते हुये सोमवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2025 में वैश्विक वृद्धि में 50 आधार अंकों की कमी आने का अनुमान है। व्यापार की मात्रा में वृद्धि 2024 के स्तर से आधी होकर 1.7 प्रतिशत तक रह सकती है। वैश्विक मुद्रास्फीति जोखिम नियंत्रित रहेगा। भू-राजनीतिक जोखिम उच्च बना हुआ है। उभरते बाजारों में, धीमी वृद्धि केंद्रीय बैंकों को समायोजन में तेजी लाने के लिए प्रेरित कर सकती है। 

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