खेल रत्नों को भी इन्तजार है महाराणा प्रताप अवार्ड का

राजस्थान का खेल विभाग चार साल से नहीं दे रहा है खिलाड़ियों को पुरस्कार

खेल रत्नों को भी इन्तजार है महाराणा प्रताप अवार्ड का

राजस्थान की पैरा निशानेबाज अवनी लेखरा और बैडमिंटन खिलाड़ी कृष्णा नागर को देश के सबसे बड़े खेल सम्मान मेजर ध्यान चन्द खेल रत्न से नावाजा लेकिन राजस्थान का खेल विभाग अपने स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मान देने में अब भी पीछे है।

 जयपुर। टोक्यो ओलंपिक खेलों को बीते एक साल पूरा होने को है। भारत सरकार ने इन खेलों में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए राजस्थान की पैरा निशानेबाज अवनी लेखरा और बैडमिंटन खिलाड़ी कृष्णा नागर को देश के सबसे बड़े खेल सम्मान मेजर ध्यान चन्द खेल रत्न से नावाजा लेकिन राजस्थान का खेल विभाग अपने स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मान देने में अब भी पीछे है।

 

राजस्थान खेल परिषद द्वारा प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को महाराणा प्रताप और सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षकों को गुरु वशिष्ठ अवार्ड से नवाजा जाता है लेकिन दुर्भाग्य से ये पुरस्कार पिछले चार वर्ष से नहीं दिए जा रहे हैं। आखिरी बार ये पुरस्कार वर्ष 2018 में दिए गए थे। हालांकि इससे पहले भी 2008 से 2016 तक के पुरस्कार भी एक साथ दिए गए। खेल परिषद सूत्रों के अनुसार चार साल के दौरान 205 खिलाड़ियों ने महाराणा प्रताप पुरस्कार के लिए आवेदन किया है, वहीं वशिष्ठ पुरस्कार के लिए 77 प्रशिक्षक अपनी दावेदारी जता चुके हैं। इस वर्ष पुरस्कारों के लिए आवेदन अब मांगे जाएंगे। आवेदन करने वालों में पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता अवनी लेखरा और कृष्णा नागर भी शामिल हैं।

1983 में हुई थी पुरस्कारों की शुरुआत
राजस्थान खेल परिषद द्वारा महाराणा प्रताप पुरस्कारों की शुरुआत 1983 में की गई। 1982 के दिल्ली एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले प्रदेश के 11 खिलाड़ियों को इस पुरस्कार से नवाजा गया। पहली बार यह पुरस्कार हासिल करने वाले खिलाड़ियों में एथलीट गोपाल सैनी, राजकुमार, हमीदा बानो, हॉकी खिलाड़ी गंगोत्री भंडारी, वर्षा सोनी, गोल्फर लक्ष्मण सिंह, घुड़सवार रघुवीर सिंह, जीएम खान, प्रहलाद सिंह और निशानेबाज कर्णी सिंह शामिल थे।

अब तक 170 खिलाड़ी सम्मानित
राजस्थान खेल परिषद द्वारा विभिन्न खेलों के करीब 170 खिलाड़ियों को महाराणा प्रताप पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या एथलीट और साइक्लिस्टों की है। एथलेटिक्स के 25 और साइक्गिंल के 18 खिलाड़ियों को यह पुरस्कार दिया गया है। वहीं प्रशिक्षकों को दिए जाने वाले गुरु वशिष्ठ पुरस्कार से 40 प्रशिक्षकों को नवाजा गया है।


जयपुर के पोकरमल बने थे पहले गुरु वशिष्ठ
गोपाल सैनी और राजकुमार सरीखे अंतरराष्ट्रीय एथलीट तैयार करने वाले राजस्थान खेल परिषद के एथलेटिक्स कोच पोकरमल को पहला गुरु वशिष्ठ अवार्ड दिया गया था। उनके साथ ही बीकानेर के साइक्लिंग कोच रामदेव को भी इस पुरस्कार से नवाजा गया। बीकानेर शुरू से ही राजस्थान में साइक्लिस्टों का गढ़ रहा है।

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