बेनकाब हुई मान के वीडियो को छिपाने की कोशिश : अब इस्तीफ़ा ही एकमात्र विकल्प, आरपी सिंह ने की मांग
पुलिस शाखा ने इस संबंध में आपराधिक मामला किया दर्ज
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े विवादित वीडियो मामले में हरियाणा के गुरुग्राम में प्राथमिकी दर्ज किये जाने पर उनसे इस्तीफे की मांग की है। सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि मान के वीडियो को छिपाने की कोशिश बेनकाब हो गयी है। गुरुग्राम पुलिस की अपराध शाखा ने इस संबंध में आपराधिक मामला दर्ज किया है। इससे पंजाब के मुख्यमंत्री को राजनीतिक और धार्मिक बर्बादी से बचाने के लिए फॉरेंसिक सबूतों में हेरफेर करने की सरकारी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। भाजपा प्रवक्ता ने लिखा, प्राथमिकी संख्या 0263 (डीएलएफ सेक्टर-29) का सामने आना एक बड़े धमाके जैसा है।
उन्होंने कहा कि यह सिफऱ् एक राजनीतिक विवाद नहीं है। यह एक गंभीर आपराधिक जांच का मामला है। प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सख्त धाराओं का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें संगठित अपराध के लिए धारा 111(2)(ए), धोखाधड़ी की के लिए धारा 318(2), और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में हेरफेर के लिए धारा 336/340 शामिल हैं। साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कानून भी लागू किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र को असलियत बदलने के लिए कानूनी डेटा को सुनियोजित तरीके से गढऩे की कोशिश करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
सिंह ने कहा कि प्राथमिकी के मुताबिक व्हिसलब्लोअर जसप्रीत को 15-16 जून को गुरुग्राम के क्राउन प्लाजा होटल में कुछ लोगों ने घेरा, जो खुद को पंजाब के वरिष्ठ अधिकारी और एक को बड़े अधिकारी (बड़े साहब) बता रहे थे। उन्होंने कहा कि जब जसप्रीत ने उन्हें चेतावनी दी कि वीडियो इतना खराब है कि वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं किया जा सकता कि यह डीपफेक है, तो मामला गंभीर हो गया। उनके परिवार को गंभीर धमकियां दी गईं और एक मनमुताबिक'कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) से तैयार वीडियो क्लीन चिट (पाक साफ) खरीदने के लिए उनकी गाड़ी में जबरन 10 लाख रुपये नगद रख दिया। भाजपा प्रवक्ता ने लिखा कि जब विशेषज्ञ अपनी बात से नहीं डिगे, तो साजिश रचने वालों ने उन्हें दरकिनार कर दिया। पंजाब के अज्ञात अधिकारियों ने पंचकूला और दिल्ली में दो ठेके पर काम करने वाले अरुण महेंद्रू और अंकित शर्मा को पेन ड्राइव पहुंचाईं।
अधिकारियों की तरफ से लगातार व्हाट््एस पर मिल रहे निर्देशों के तहत उन्होंने साइफर सेंटिनल लैब और साइबर यान लैब के नाम से देखने में असली लगने वाले अनापत्ति प्रमाणपत्र बनाए। उन्होंने कहा कि जांचकर्ताओं ने पाया कि ये लैब असल में कहीं मौजूद ही नहीं हैं और न ही इनके पास कोई कानूनी मान्यता है। अब दोनों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, कुछ ही दिन पहले आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व ने बड़े गर्व से स्वतंत्र लैब रिपोर्ट दिखाई थी, ताकि मान को बेदाग़ साबित किया जा सके और अकाल तख्त साहिब के उस आधिकारिक बयान को खुलेआम चुनौती दी जा सके जिसमें कहा गया था कि वीडियो असली है। उन्होंने आज, वे स्वतंत्र लैब असल में धोखाधड़ी करने वाले नकली सेटअप निकले, जिन्हें ठेके पर रखे गए लोग चला रहे थे और जो एक आपराधिक गिरोह का हिस्सा थे। सिंह ने कहा, नकली विज्ञान और सरकार के समर्थन से डरा-धमकाकर पंथ और जनता को गुमराह करना मान सरकार के लिए एक घातक चोट है। अब इस्तीफ़ा ही एकमात्र विकल्प बचा है।
उल्लेखनीय है कि जनवरी 2026 की शुरुआत में अकाल तख्त साहिब ने मान को सिख आचार संहिता, अकाल तख्त की सर्वोच्चता और गुरु की गोलक को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में तलब किया था। अकाल तख्त की ओर से जारी पत्र में मान से जुड़े कुछ आपत्तिजनक वीडियो का भी जिक्र किया गया था, जिनमें उन पर सिख गुरुओं और जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीरों के साथ अनुचित गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था।

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