दिग्विजय सिंह का मोहन यादव सरकार पर हमला, सागर एसपी को हटाने और जहरीली शराब कांड की ईओडब्ल्यू जांच की मांग
दिग्विजय सिंह ने की EOW जांच की मांग
सागर। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सागर पुलिस अधीक्षक को हटाकर जहरीली-अवैध शराब प्रकरण की जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) से कराने की मांग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से की है। सिंह ने यह मांग बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली-अवैध शराब से प्रभावित परिवारों से मिलने के बाद सागर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा के दौरान की। सिंह ने आरोप लगाया कि सागर जिले में आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन के संरक्षण में अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है। उन्होंने जिला पुलिस अधीक्षक पर भी प्रमाण के साथ आरोप लगाने का दावा करते हुए कहा कि आरोप गलत हैं तो उनके विरुद्ध न्यायालय में मानहानि का दावा किया जाए। उन्होंने शिवपुरी के एक लाइसेंसी शराब ठेकेदार की भी जांच कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि बंडा-शाहगढ़ में हुई मौतों को लेकर अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए तथा जिन लोगों से मृतकों एवं प्रभावितों ने शराब खरीदी, उन्हें भी आरोपी बनाया जाना चाहिए। जहरीली-अवैध शराब प्रकरण की मजिस्ट्रियल जांच के संबंध में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि उन्हें इस जांच पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश वी.के. चौहान द्वारा व्यापमं घोटाले की जांच कर संबंधित लोगों को क्लीन चिट दी गई थी।
सिंह ने जहरीली-अवैध शराब के सेवन से मृत चार परिवारों को गोद लेने की घोषणा की। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सहित सभी कांग्रेसजनों से भी एक-एक परिवार को गोद लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि वे पीड़ित परिवारों की पत्नियों को प्रतिमाह 10-10 हजार रुपये भेजेंगे तथा बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी स्वयं उठाएंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में मृतकों के परिजनों को मुआवजे के संबंध में घटना के सात दिन बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि धरना-प्रदर्शन के दौरान अपर कलेक्टर ने मौके पर चार लाख रुपये के साथ दो लाख रुपये अतिरिक्त दिलाने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मुआवजा केवल संबल कार्डधारकों को मिलेगा या जहरीली-अवैध शराब के सेवन से प्रभावित सभी लोगों को।
सिंह ने आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर से कई बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि वे इस संबंध में मुख्य सचिव से भी चर्चा करेंगे।

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