कांग्रेस का केंद्र पर हमला, जयराम रमेश बोले- चीन के सामने ‘नियोजित समर्पण’, सरकार की चीन नीति पर उठाए गंभीर सवाल
पूर्वोत्तर की जल सुरक्षा पर खतरा
नई दिल्ली। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ब्रिक्स बैठक के दौरान केंद्र सरकार चीन के सामने समर्पण करती नजर आई है जिसे देखते हुए सरकार की चीन नीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को यहां एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार को अब उन सवालों पर पर चुप्पी तोड़ने होगी जिनका जवाब देश आज भी मांग रहा है। उनका कहना था कि भारत-चीन संबंधों के सामान्य करने के नाम पर सरकार की ओर से 'कैलिब्रेटेड कैपिटुलेशन' यानी नियोजित समर्पण दिख रहा है।
रमेश ने पूछा कि क्या 19 जून 2020 को चीन को दी गई उस 'क्लीन चिट' ने भारत को कमजोर नहीं किया जिसमें 15-16 जून 2020 की रात गलवान घाटी में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। इसके सिर्फ चार दिन बाद 19 जून को सर्वदलीय बैठक में कहा गया था कि "ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है, ना ही कोई घुसा हुआ है।" यह बयान कभी वापस नहीं लिया गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या इससे भारत की बातचीत की स्थिति कमजोर नहीं हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख और अब अरुणाचल प्रदेश में चीन की क्षेत्रीय बढ़त को अनुमति दी गई है। पूर्वी लद्दाख में पारंपरिक गश्त और चराई के अधिकार चुपचाप छोड़ दिए गए। अरुणाचल में चीनी घुसपैठ, गश्त बिंदुओं तक पहुंच खोना और नए स्टैंड ऑफ की खबरें आ रही हैं। चीन 'साउथ तिब्बत' का दावा दोहरा रहा है, शहरों के नाम बदल रहा है और ब्रह्मपुत्र पर 60,000 मेगावाट के मेडोग मेगा-डैम को आगे बढ़ा रहा है, जिससे पूरे पूर्वोत्तर की जल सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
जयराम रमेश ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की मदद में चीन की भूमिका पर भारत का रुख क्यों नरम पड़ा। पिछले वर्ष 4 जुलाई को लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने चीन की गहरी और निर्णायक भूमिका का जिक्र किया था, लेकिन गत 25 अगस्त को पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने वीआईएफ में बिल्कुल अलग रुख अपनाया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या यह कल की बैठक से पहले माहौल बदलने की रणनीति थी।
उन्होंने व्यापार घाटे पर भी सवाल किया और कहा कि 2025-26 में भारत-चीन व्यापार घाटा 112.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। एमएसएमई समेत उद्योगों को भारी नुकसान हो रहा है और :मेक इन इंडिया' तथा 'इम्पोर्ट फ्रॉम चाइना' एक ही सिक्के के दो पहलू बन गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि इस स्थिति को बदलने का रोडमैप कहां है। कांग्रेस नेता ने कहा "संबंध सामान्य बनाना एक बात है, लेकिन सरकार की ओर से जो रवैया दिखा है, वह नियंत्रित समर्पण है।"

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