महबूबा मुफ्ती ने ब्रिक्स में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा का किया स्वागत, भारत से गाजा-ईरान पर स्पष्ट रुख की मांग
आतंकवाद और नागरिक सुरक्षा में दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए
श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने पहलगाम आतंकी हमले की ब्रिक्स की ओर से निंदा किये जाने का स्वागत किया है। इसके साथ ही महबूबा ने सवाल उठाया कि समूह की अध्यक्षता कर रहे भारत ने वैश्विक स्तर पर हिंसा और मानवीय पीड़ा के खिलाफ मजबूत रुख अपनाने के लिए इस मंच का इस्तेमाल क्यों नहीं किया। राष्ट्रीय राजधानी में भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नयी दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया गया। इसमें अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गयी, आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति की पुष्टि की गयी और आतंकवाद के वित्तपोषण तथा सुरक्षित ठिकानों सहित इसके सभी रूपों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया गया।
महबूबा कहा कि भारत को ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए 'साहस और वास्तविक नेतृत्व' का परिचय देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि साझा घोषणापत्र में गाजा के विनाश और ईरान पर अमेरिकी-इजरायल के सैन्य हमलों का भी खुलकर उल्लेख किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, "आतंकवाद की चयनात्मक निंदा नहीं की जा सकती। नागरिकों के खून की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती और अंतरराष्ट्रीय न्याय में दोहरा मापदंड नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि आम नागरिकों पर हमलों की निंदा करने का सिद्धांत सार्वभौमिक होना चाहिए और यह प्रभावित लोगों की राष्ट्रीयता, धर्म या भू-राजनीतिक जुड़ाव पर निर्भर नहीं हो सकता। ब्रिक्स घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की गयी है, अधिकतम संयम बरतने का आह्वान किया गया है और बातचीत, परामर्श एवं कूटनीति के माध्यम से विवादों को सुलझाने का आग्रह किया गया है। इसमें नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया और शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं से जुड़े हमलों पर चिंता जतायी गयी।
महबूबा ने कहा कि इन प्रतिबद्धताओं पर बिना किसी भेदभाव के अमल होना चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद के खात्मे और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है, तो पीड़ितों के बीच कोई फर्क नहीं किया जा सकता और न ही सुविधा के हिसाब से विरोध जताया जा सकता है।" उन्होंने गाजा को मानवीय सहायता देने के ब्रिक्स के आह्वान का भी स्वागत किया और कहा कि केवल मानवीय राहत जवाबदेही तय करने और हिंसा को समाप्त करने का विकल्प नहीं हो सकती। गाजा पर घोषणापत्र के रुख में मानवीय सहायता का समर्थन शामिल है, जबकि पश्चिम एशिया पर इसकी व्यापक भाषा में संयम, नागरिक सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के पालन का आह्वान किया गया है।
उन्होंने कहा, "पहलगाम, गाजा या ईरान में आम नागरिकों की पीड़ा को अलग-अलग नैतिक या राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जा सकता। हर मानव जीवन पर एक ही मानक लागू होना चाहिए। बहुपक्षीय संस्थानों की विश्वसनीयता बिना किसी डर या पक्षपात के इस सिद्धांत को बनाये रखने की उनकी क्षमता पर निर्भर करती है।" उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में भारत का नेतृत्व एक सुसंगत, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत कर ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, जिसमें आतंकवाद, नागरिकों पर हमलों और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की निंदा की जाती है, चाहे उन्हें कोई भी अंजाम दे। महबूबा ने कहा, "भारत को एक मिसाल कायम करनी चाहिए। अगर नागरिकों के खून की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती, तो न्याय में भी दोहरा मापदंड नहीं हो सकता।"

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