पिछली बार निकायों का जिम्मा संभालने वालों की झलक: 26 निकायों में मेयर, सभापति, पालिका अध्यक्ष की पांच साल से पहले ही गई कुर्सी

निकायों में निलंबन और कानूनी लड़ाइयों के कारण बार-बार कार्यवाहक अध्यक्ष बदलने पड़े

पिछली बार निकायों का जिम्मा संभालने वालों की झलक: 26 निकायों में मेयर, सभापति, पालिका अध्यक्ष की पांच साल से पहले ही गई कुर्सी
राजस्थान के पिछले नगर निकाय कार्यकाल के दौरान 26 से अधिक महापौर, सभापति और पालिका अध्यक्ष भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और न्यायिक जांच के चलते अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। जयपुर ग्रेटर और हेरिटेज सहित कई निकायों में निलंबन और कानूनी लड़ाइयों के कारण बार-बार कार्यवाहक अध्यक्ष बदलने पड़े।

जयपुर। राजस्थान के पिछले नगर निकाय चुनावों में जिन महापौर, सभापति और पालिका अध्यक्षों को पांच साल के लिए चुना था, उनमें से 26 से अधिक अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। सरकार की कार्रवाई, न्यायिक जांच, भ्रष्टाचार के आरोप, पद के दुरुपयोग और चुनाव के समय दी गई गलत जानकारी जैसे मामलों में इन्हेंहटाया या निलंबित किया गया और उनकी जगह दूसरे पार्षदों को कार्यवाहक की जिम्मेदारी दी गई। पिछला निकाय चुनाव एक साथ नहीं हुआ था। 49 निकायों में नवंबर 2019 में, करीब 56 निकायों में अक्टूबर-दिसंबर 2020 के दौरान और 90 निकायों में जनवरी-फरवरी 2021 में चुनाव हुए थे। यानी करीब 195-196 पुराने निकायों की चुनावी समय-सारणी अलग-अलग रही। यही अंतर आगे चलकर कार्यकाल समाप्त होने की तारीखों में भी दिखाई दिया।

सबसे चर्चित मामला जयपुर ग्रेटर नगर निगम का रहा। जून 2021 में महापौर सौम्या गुर्जर को निगम आयुक्त से कथित दुर्व्यवहार के मामले में निलंबित किया और पार्षद शील धाभाई को कार्यवाहक महापौर की जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन कानूनी राहत के कारण वे वापस भी आईं। इसके बाद जयपुर हेरिटेज में मुनेश गुर्जर का मामला आया। पति से जुड़े रिश्वत प्रकरण के बाद उन्हें महापौर और पार्षद पद से निलंबित किया गया। बाद में कानूनी राहत के कारण वे वापस भी आईं, लेकिन सितंबर 2024 में फिर निलंबित होने के बाद कुसुम यादव को कार्यवाहक महापौर बनाया गया।

सवाल सिर्फ अध्यक्षों और बोर्ड के कार्यकाल का ही नहीं है। नगर निकायों के कामकाज में विभिन्न समितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राजस्थान नगरपालिका अधिनियम के तहत समितियों के गठन का प्रावधान है। उदाहरण के तौर पर नगर निगम ग्रेटर जयपुर में 28 जनवरी 2021 की बोर्ड बैठक में ही अधिनियम की धारा 55 व 56 के तहत समितियों के गठन का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन कई निकायों में समितियों के गठन और उनके प्रभावी संचालन में राजनीतिक खींचतान, बोर्ड के भीतर गुटबाजी और प्रशासनिक स्तर पर देरी का असर दिखाई दिया।

सवाई माधोपुर में सभापति विमल चंद महावर को रिश्वत प्रकरण के बाद निलंबित किया गया और इसके बाद लगातार अलग-अलग पार्षदों को कार्यवाहक सभापति बनाया जाता रहा। देवगढ़ में अध्यक्ष शोभालाल रेगर पर ईओ के साथ विवाद, पद के दुरुपयोग और कर्मचारियों की कार्यबहिष्कार की स्थिति पैदा होने के मामले में कार्रवाई हुई। सरकार ने उन्हें अध्यक्ष और सदस्य पद से निलंबित किया। कुशलगढ़ में अध्यक्ष बबलू मुंडा के खिलाफ  विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित होने पर जनवरी 2023 में निलंबन हुआ और दूसरे पार्षद को कार्यभार दिया गया।

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दौसा की सभापति ममता चौधरी को भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग के आरोपों में अक्टूबर 2024 में निलंबित किया गया। बूंदी में सभापति मधु नुवाल पर सरकारी जमीन पर कब्जे और पद के दुरुपयोग के आरोपों की जांच के बाद निलंबन हुआ। बाद में दूसरे पार्षद को सभापति का कार्यभार सौंपा गया। करौली में सभापति राशिदा खातून को गंभीर शिकायतों के चलते निलंबित किया गया और जुलाई 2024 में पार्षद पूनम पचौरी को कार्यवाहक सभापति बनाया गया। रायसिंहनगर में तत्कालीन अध्यक्ष मनीष मोहन कौशल भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित हुए और बाद में नया अध्यक्ष नियुक्त करना पड़ा। 

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