राजनीतिक दल से चुनाव लड़ने वाला कर्मचारी नहीं रह सकता तटस्थ, हाईकोर्ट ने कहा- वापस सेवा में नहीं लेने का आदेश सही
चुनाव हारने पर इस्तीफा वापसी की याचिका हाईकोर्ट से खारिज
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने रेलवे के एक अधिकारी की ओर से विधानसभा चुनाव हारने के बाद अपना इस्तीफा वापस लेने की अनुमति नहीं देने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक राजनीतिक दल के आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इसलिए वह राजनीतिक रूप से तटस्थ नहीं रह सकता था। इसके अलावा इस्तीफा वापस लेने की अनुमति देने से उसे निरंतर सेवा में रहा हुआ माना जाता, जिसका मतलब यह होता की वह अपनी सेवा अवधि के दौरान राजनीतिक गतिविधियों में लिप्त माना जाता। जबकि 1964 के नियमों में प्रावधान है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी भी राजनीतिक दल या संगठन से जुडा हुआ नहीं रहेगा।
कर्मचारी ने चुनाव लड़ने के लिए अपनी इच्छा से इस्तीफा दिया
जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह आदेश नीरज बिश्नोई की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि चुनाव हार जाना अपने आप में इस्तीफा वापस लेने की ऐसी वजह नहीं है, जिसे नियमों के तहत बाध्यकारी कारण या परिस्थितियों में अहम बदलाव माना जाए। कर्मचारी ने चुनाव लड़ने के लिए अपनी इच्छा से इस्तीफा दिया था। उसने इस्तीफा देने की वजह पर अमल भी किया और विधानसभा चुनाव भी लड़ा।
रेलवे में सीनियर ऑडिटर के पद पर कार्यरत था याचिकाकर्ता
याचिका में कहा गया कि वह उत्तर-पश्चिम रेलवे में सीनियर ऑडिटर के पद पर कार्यरत था। उसने विगत विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए 10 अक्टूबर, 2023 को इस्तीफा दिया था और विभाग ने 1 नवंबर को उसे स्वीकार कर लिया। इसके बाद उसने चूरू के रतनगढ़ विधानसभा सीट से बीएसपी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लडा, लेकिन वह हार गया। चुनाव परिणाम आने के बाद एक जनवरी को उसने इस्तीफा वापस लेने और सेवा में बहाली के लिए आवेदन दिया। जिसे विभाग ने 29 जनवरी को खारिज कर दिया। इसके चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने पूर्व में केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण में अपील दायर की थी। जिसके अधिकरण के खारिज कर दिया था। इस पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उसने नियमानुसार तय अवधि में इस्तीफा वापस लेने के लिए आवेदन कर दिया था।
इसके अलावा उसे इस्तीफा देते समय यह जानकारी नहीं थी कि इससे उसकी पेंशन व अन्य रिटायर परिलाभों पर असर पड़ेगा। इसकी जानकारी मिलने पर उसने इस्तीफा वापस लेने के लिए आवेदन कर दिया। इसलिए इसे परिस्थितियों में बदलाव मानते हुए इस्तीफा वापस लेने की अनुमति दी जानी चाहिए। जिसका विरोध करते हुए रेलवे के अधिवक्ता वीपी माथुर ने कहा कि याचिकाकर्ता ने चुनाव लड़ने के लिए सोच-समझकर नौकरी छोड़ी थी। चुनाव में हार के बाद वह अपने फैसले से पीछे हटकर दोबारा सरकारी नौकरी का दावा नहीं कर सकता। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद पेंशन और रिटायर परिलाभ का नुकसान सामने आना, इस्तीफा वापस लेने के लिए नियमों में बताई गई बाध्यकारी वजह नहीं माना जा सकता हैं।

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