स्कूली शिक्षा के मामले में राजस्थान के 25 जिलों का स्तर अति उत्तम, सात जिले उत्तम श्रेणी में

केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में आया सामने

स्कूली शिक्षा के मामले में राजस्थान के 25 जिलों का स्तर अति उत्तम, सात जिले उत्तम श्रेणी में
जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर, अलवर, धौलपुर, बारां, झालावाड़, बूंदी, दौसा, सवाई माधोपुर, नागौर, चुरू, झुंझुनू, सीकर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, गंगानगर, बाड़मेर, जालौर, जैसलमेर, हनुमानगढ़, टोंक और राजसमंद अति उत्तम श्रेणी में शामिल है।

नवज्योति ब्यूरो, नई दिल्ली। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय की एक ताजा रिपोर्ट में राज्य ने स्कूली शिक्षा के मामले में अच्छा प्रदर्शन किया है। जिलों के प्रदर्शन पर आधारित सूचकांक पर जारी हुई रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 25 जिलों ने अति-उत्तम श्रेणी में अपना स्थान बनाया है। इसी प्रकार ‘सीखने की क्षमता’ में भी राजस्थान ने बाकी राज्यों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है।

केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट वर्ष 2020-21 और 2021-22 के लिए है। जो जिलों के प्रदर्शन क्रम निर्धारण सूचकांक पर आधारित है। इसके लिए राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में साल 2020-21 के दौरान 742 जिलों और साल 2021-22 में 748 जिलों को शामिल किया गया है। यह सूचकांक जिला स्तर पर विद्यालयी शिक्षा प्रणाली के प्रदर्शन का आकलन प्रस्तुत करता है। इस सारी कवायद में करीब 14.9 लाख स्कूल, 95 लाख शिक्षक और विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि के लगभग 26.5 करोड़ छात्र शामिल हैं।

अति उत्तम श्रेणी में शामिल जिले
जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर, अलवर, धौलपुर, बारां, झालावाड़, बूंदी, दौसा, सवाई माधोपुर, नागौर, चुरू, झुंझुनू, सीकर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, गंगानगर, बाड़मेर, जालौर, जैसलमेर, हनुमानगढ़, टोंक एवं राजसमंद।

उत्तम श्रेणी में शामिल जिले
उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, करौली, पाली एवं सिरोही।

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इन मापदंडों के आधार पर बना सूचकांक
इसमें स्कूल का परीक्षा परिणाम, प्रभावशाली कक्षा कार्य, स्कूल भवन में बुनियादी ढांचागत सुविधाएं और छात्रों के अधिकार, स्कूल सुरक्षा एवं बाल संरक्षण, डिजिटल लर्निंग एवं प्रशासनिक प्रक्रिया को शामिल किया गया है। इन श्रेणियों को 12 डोमेन में बांटा गया। जिनमें सीखने के परिणाम एवं गुणवत्ता, अधिगम परिणाम, शिक्षक की उपलब्धता एवं व्यावसायिक विकास प्रतिफल, शिक्षण प्रबंधन, शिक्षण संवर्धन गतिविधियां, बुनियादी ढांचा एवं सुविधाएं, छात्रों के लिए अवसर, विद्यालय सुरक्षा और बाल संरक्षण, डिजिटल लर्निंग, धनराशि अभिसरण और उसका उपयोग, सीआरसी प्रदर्शन को बढ़ावा देना, उपस्थिति निगरानी प्रणाली और विद्यालयी नेतृत्व विकास जैसे विभिन्न आयाम शामिल हैं। असल में, संबंधित सूचकांक को 83 संकेतकों में 600 अंकों के आधार पर तैयार किया गया है। जिन्हें कुल छह श्रेणियों में बांटा गया।

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