भारत पूरी दुनिया को दिखा रहा है पर्यावरण संरक्षण की राह: योगी

नेशनल क्लाइमेट कॉन्क्लेव को किया संबोधित

भारत पूरी दुनिया को दिखा रहा है पर्यावरण संरक्षण की राह: योगी
उन्होने कहा कि विगत सालों में असमय अतिवृष्टि के रूप में हम इसके दुष्परिणामों को देखा है। भारत की परंपरा सदैव से पर्यावरण हितैषी रही है।

लखनऊ। पर्यावरण और प्रकृति के प्रति दायित्वों के निर्वहन की सीख देते हुये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण की राह दिखाने का कार्य कर रहा है। योगी ने सोमवार को दो दिवसीय नेशनल क्लाइमेट कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुये कहा कि जलवायु परिवर्तन आज दुनिया के सामने बड़ी चुनौती बन कर उभरा है। विकास आज की जरूरत है मगर इसका अर्थ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। मनुष्य ने अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए प्रकृति का अतिदोहन करके जिन दुष्परिणामों को आमंत्रित किया है, आज हम सब उसके भुक्तभोगी बन रहे हैं।

उन्होने कहा कि विगत सालों में असमय अतिवृष्टि के रूप में हम इसके दुष्परिणामों को देखा है। भारत की परंपरा सदैव से पर्यावरण हितैषी रही है। ये धरती हमारी माता है और हम सब इसके पुत्र हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण की नई राह दिखाने का कार्य कर रहा है। उत्तर प्रदेश में लगातार इस दिशा में कार्य हो रहे हैं। आगामी जुलाई माह में प्रदेशभर में 35 करोड़ पौधरोपण किया जाएगा। 2017 के बाद से अबतक यूपी में 133 करोड़ पौधरोपण का कार्य हुआ है। यही कारण है कि आज प्रदेश की जनता में भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर सकारात्मक भाव पैदा हुआ है।

मुख्यमंत्री ने देश भर से आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे प्राचीन ग्रंथ में वेदों में अथर्ववेद का एक सूक्त हमें धरती के प्रति अगाध निष्ठा के साथ जोड़ने का प्रयास करता है। इसके अनुसार धरती हमारी माता हैं और हम सब इसके पुत्र हैं। संपूर्ण जीव सृष्टि में प्रकृति प्रदत्त मां के प्रति दायित्व का दर्शन होता है। सीएम ने कहा कि 2017 में जब हमें सरकार बनाने का अवसर प्राप्त हुआ तब पहले वर्ष हमने पांच करोड़, फिर 10 करोड़ पौधरोपण किया। विगत 6 साल में यूपी में 133 करेाड़ पौधरोपण का कार्य किया गया है। आज यूपी में आम नागरिकों में पर्यावरण संरक्षण का भाव पैदा हुआ है। आज हम 100 साल से पुराने वृक्षों को विरासत वृक्ष के रूप में मान्यता देकर उनका संरक्षण कर रहे हैं। प्रदेश में ऐसे कई वृक्ष हैं, जिनके नीचे बैठकर क्रांतिकारियों ने देश की आजादी की रणनीति तय की।

उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में मौजूद आम के पुराने वृक्ष से संबंधित स्मृतियों का वर्णन करते हुए बताया कि बद्रीनाथ धाम के सिद्ध योगी सुंदरनाथ 1907 में गोरखनाथ मंदिर आए और वहां मौजूद आम के वृक्ष के नीचे तत्कालीन महंत बाबा गंभीरनाथ के साथ संवाद किया। वो वृक्ष आज भी वहां मौजूद है और फल देता है। इसके अलावा 1912 में भारत सेवा श्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद ने भी उसी वृक्ष के नीचे बाबा गंभीरनाथ से दीक्षा ली थी।

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