कतर की मध्यस्थता में न्यूयॉर्क में अमेरिका से हुई बातचीत में ईरान ने रखी शर्तें: बघाई
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में ईरान की मजबूत उपस्थिति
न्यूयॉर्क। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि न्यूयॉर्क में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक कतर की मध्यस्थता में हुई, जिसमें ईरान ने कूटनीतिक बातचीत फिर शुरू करने के लिए अपनी शर्तें अमेरिकी पक्ष के समक्ष स्पष्ट रूप से रखीं। बघाई ने कहा कि यह बातचीत कतर की मध्यस्थता के जरिए हुई। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिकी पक्ष को अपने विचार और शर्तें 'बहुत स्पष्ट और स्पष्ट रूप से' बताईं।
बघाई के अनुसार, ईरान की शर्तों में सभी मोर्चों पर लड़ाई समाप्त करना, अमेरिका की ओर से किए जा रहे कथित आक्रामक कृत्यों को रोकना, ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और आर्थिक युद्ध समाप्त करना तथा ईरान की संपत्तियां जारी करना शामिल है। उन्होंने कहा कि ईरान ने पिछले कुछ सप्ताहों में कूटनीति को लेकर अपनी शर्तें और रुख अमेरिका तक पहुंचाया है। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ईरान का रुख भी शामिल है। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी ने इन मुद्दों को अमेरिकी पक्ष के समक्ष स्पष्ट रूप से रखने का अवसर दिया।
ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच यह बैठक मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर हुई। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर कई देशों के अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। उन्होंने कहा कि इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ पश्चिम एशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों में मौजूदा घटनाक्रम पर चर्चा हुई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिये भाषण में ईरान के खिलाफ की गयी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बघाई ने कहा कि ये टिप्पणियां केवल 'दोहराये गये दावे और आरोप' थीं, जो हताशा को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा कि यहां मौजूद कई देशों के राजनयिकों और प्रतिनिधिमंडलों का भी यही आकलन था कि ये टिप्पणियां ताकत के बजाय हताशा से प्रेरित थीं। बघाई ने कहा कि सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय जमावड़े संयुक्त राष्ट्र महासभा को ऐसी टिप्पणियों के लिए मंच में बदलना, जो 'पूरी तरह गैरकानूनी' और कूटनीतिक मानदंडों के विपरीत हैं, ताकत का संकेत नहीं है। उन्होंने कहा, "किसी देश को सैन्य हमले की धमकी देना अमेरिका में मौजूदा शासन की प्रकृति और अंतरराष्ट्रीय अपराध किए जाने की स्वीकारोक्ति है।"
बघाई ने बताया कि ट्रंप की टिप्पणियों के विरोध में विदेश मंत्री अराघची के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल बैठक से बाहर चला गया। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन का एक राजनयिक सामान्य प्रक्रिया के तहत बैठक में मौजूद रहा और वहां की चर्चा पर नजर रखी। सभी ईरानी प्रतिनिधियों के बैठक से बाहर नहीं जाने के सवाल पर बघाई ने कहा कि ईरानी राजनयिक संयुक्त राष्ट्र में ईरान की सीट को अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए एक मजबूत आधार मानते हैं।
उन्होंने कहा, "संयुक्त राष्ट्र महासभा जैसे मंच पर ईरान की सीट हमारा मजबूत आधार है और निश्चित रूप से यदि हम दूसरों की कठोर, शत्रुतापूर्ण या आपत्तिजनक टिप्पणियों के कारण इस मजबूत आधार को छोड़ देते हैं तो हम अपने दायित्व को पूरा करने में विफल होंगे।" बघाई ने कहा कि ईरानी राजनयिकों का दायित्व है कि वे घटनाक्रम पर नजर रखें और ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में ईरान की मजबूत उपस्थिति बनाये रखें।

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