लाल किले से मोदी का विपक्ष पर सियासी वार : कुछ मुट्ठीभर निराशावादी भारत का भला नहीं सोच सकते, उनसे देश को बचाना होगा
लाल किले से मोदी ने रखा सियासी विजन
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसी का नाम लिए बिना विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि कुछ लोग देश की प्रगति देख नहीं सकते और भारत का भला नहीं सोच सकते इसलिए वे लोगों को गुमराह करने में लगे रहते हैं। मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए शनिवार को कहा कि भारत के पास सरकार, जीवंत लोकतंत्र तथा सभी का मार्गदर्शन करने वाला संविधान है और इसके आधार पर देश संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो प्रगति देख नहीं सकते।
उन्होंने कहा, कुछ लोग भारत का भला सोच नहीं सकते हैं। देश को ऐसे लोगों से बचना होगा। ऐसे मुट्ठी भर लोग निराशा के गर्त में डूबे हुए हैं और जब उनकी गोद में विकृति पलती है तो वह विनाश और सर्वनाश का कारण बन जाती है। ऐसे छुटपुट निराशावादी तत्वों को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के पास स्थिर राजनीतिक जनादेश, स्थिर सरकार, जीवंत लोकतंत्र, मजबूत न्यायिक व्यवस्था और सभी का मार्गदर्शन करने वाला संविधान है। इसके बावजूद अभी देश में राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है।
मोदी ने कहा कि उनका सपना है कि ऐसे एक लाख युवा राजनीति में आएं, जिनके परिवार का राजनीति से कोई नाता नहीं रहा है। ये युवा किसी भी राजनीतिक दल में जा सकते हैं और इससे देश का लोकतंत्र और मजबूत होगा। मोदी ने इस अवसर पर धर्मनिरपेक्ष समान नागरिक संहिता की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि इस दिशा में राज्य सरकारों को आगे बढऩा चाहिए। समान नागरिक संहिता भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पुराना मुद्दा रहा है। महिला आरक्षण को लेकर उन्होंने कहा, मैं राष्ट्रध्वज के नीचे खड़ा होकर विपक्षी दलों से करबद्ध अनुरोध करता हूं कि वे महिलाओं के लिए विधायिका में आरक्षण की व्यवस्था को लागू करने में सहयोग करें।

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