युद्ध की बदलती चुनौतियों के लिए सेना को नई प्रौद्योगिकी और ताकत से लैस करने पर जोर: राजनाथ सिहं
'असनी', 'भैरव' और 'शक्तिबाण' प्लाटून की प्रभावी भूमिका
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि सेना को मौजूदा तथा भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार सक्षम बनाना जरूरी है इसलिए युद्ध के बदलते तौर-तरीकों को देखते हुए उसे आधुनिक प्रौद्योगिकी, नए हथियारों और बेहतर युद्धक क्षमता से लैस करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने के साथ-साथ ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
रक्षा मंत्री ने मंगलवार को जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, बदलती युद्ध परिस्थितियों और भविष्य की सैन्य जरूरतों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें आधुनिक हथियारों और सैन्य प्रणालियों को सेना में शामिल करने, तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त योजना और स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में प्रौद्योगिकी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सेना को नई प्रौद्योगिकियों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है। उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से विकसित किए जा रहे आधुनिक हथियारों, मिसाइलों और सैन्य प्रणालियों का जिक्र किया। साथ ही रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों, छोटे उद्योगों, स्टार्टअप और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना की ताकत केवल हथियारों और आर्थिक संसाधनों से तय नहीं होती, बल्कि जवानों की क्षमता और तैयारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुसार तीनों सेनाएं अपनी संरचना और कार्यप्रणाली में बदलाव कर रही हैं। उन्होंने भारतीय सेना की 'असनी', 'भैरव' और 'शक्तिबाण' प्लाटून का उल्लेख करते हुए कहा कि ये मौजूदा सैन्य जरूरतों को पूरा करने में प्रभावी साबित हो रही हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में रक्षा बजट बढ़ाकर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये किया गया है। इसमें 2.19 लाख करोड़ रुपये आधुनिक सैन्य उपकरणों और हथियारों की खरीद के लिए रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि सेना की जरूरतों के अनुसार बजट का सही इस्तेमाल और जरूरी सैन्य क्षमताओं को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि देश में रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, रक्षा निर्यात 2014 में 2,000 करोड़ रुपये से कम था, जो बढ़कर करीब 40 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता के लिए देश में ही हथियारों और सैन्य प्रौद्योगिकी का विकास और निर्माण जरूरी है। इससे विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान, स्वदेशी प्रौद्योगिकी और निजी उद्योगों की भागीदारी को लगातार बढ़ाने पर भी जोर दिया।
बैठक में सांसदों ने अपने सुझाव रखे। चर्चा में जरूरी सैन्य क्षमताओं को प्राथमिकता देने, रक्षा खरीद और विकास की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने तथा विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच तालमेल मजबूत करने पर जोर दिया गया। आधुनिकीकरण की प्रगति की नियमित समीक्षा करने और तय लक्ष्यों के अनुसार काम पूरा करने की जरूरत भी बताई गई। बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्व सैनिक कल्याण सचिव सुकृति लिखी, रक्षा वित्त सचिव विश्वजीत सहाय सहित वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

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