रोहित वेमुला के सवाल खत्म नहीं हुए : यह लड़ाई लड़ते रहना हमारी जिम्मेदारी, राहुल गांधी ने कहा- देश में सपने देखने का सबको बराबर का हक
समाज और इंसानियत को समझकर इस मुल्क को बेहतर बनाना
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि एक दशक पहले जिस रोहित वेमुला की जान गयी थी, उसी तरह के सवाल आज भी खत्म नहीं हुए है और देश का दलित समाज उसी तरह के माहौल का हिस्सा बना हुआ। इसलिए उसकी लड़ाई लड़ते रहना हमारी जिम्मेदारी।
नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि एक दशक पहले जिस रोहित वेमुला की जान गयी थी, उसी तरह के सवाल आज भी खत्म नहीं हुए है और देश का दलित समाज उसी तरह के माहौल का हिस्सा बना हुआ है। इसलिए उसकी लड़ाई लड़ते रहना हमारी जिम्मेदारी है। गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि आज रोहित वेमुला को गए 10 साल हो गए, लेकिन उसका सवाल आज भी हमारे सीने में धड़क रहा है और पूछा जा रहा है कि क्या इस देश में सपने देखने का हक सबको बराबर है। उनका कहना था कि रोहित पढऩा, लिखना चाहता था। विज्ञान, समाज और इंसानियत को समझकर इस मुल्क को बेहतर बनाना चाहता था, लेकिन इस व्यवस्था को एक दलित का आगे बढऩा मंजूर नहीं था।
उन्होंने कहा कि देश में आज भी संस्थागत जातिवाद, सामाजिक बहिष्कार, बेइज्जती, 'औक़ात' दिखाने वाली भाषा और अमानवीय व्यवहार है और यही वह जहर था, जिसने एक होनहार युवा को उस मुक़ाम तक धकेल दिया, जहाँ उसकी गरिमा छीन ली गई और उसे अकेला कर दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या आज दलित युवाओं की हक़ीक़त क्या बदली है। उनका कहना था कि कैंपस में वही तिरस्कार, हॉस्टल में वही अलगाव, क्लास में वही कमतर समझना, फिर वही हिंसा और कभी-कभी वही मौत, क्योंकि जाति आज भी इस देश में सबसे बड़ा एडमिशन फ़ॉर्म है। इसीलिए रोहित वेमुला एक्ट कोई नारा नहीं, एक जरूरत है, ताकि शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव अपराध बने, दोषियों पर स$ख्त कार्रवाई हो, और किसी भी छात्र को उसकी जाति के नाम पर तोडऩे, चुप कराने और बाहर करने की छूट खत्म हो। गांधी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ संसद की नहीं है।
यह लड़ाई कैंपस की है, युवाओं की है, हमारी है। दलित युवाओं-आवाज उठाओ, संगठन बनाओ, एक-दूसरे के साथ खड़े रहो। मांग करो रोहित वेमुला एक्ट अभी लागू करो। भेदभाव-विरोधी क़ानून अभी चाहिए। कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस की सरकारें इस कानून को जल्द से जल्द लागू करने की प्रक्रिया में हैं। हम एक ऐसा भारत चाहते है, जो न्यायपूर्ण, मानवीय और समान हो -जहाँ किसी दलित छात्र को अपने सपनों की कीमत अपनी जान से न चुकानी पड़े। रोहित, तुम्हारी लड़ाई हमारी जिम्मेदारी है।

Comment List