पेट्रोल में 31% इथेनॉल : शिवकुमार के दावे से मचा हड़कंप, अब पेश करेंगे सबूत
अब सबूतों के साथ सरकार करेगी बड़ा खुलासा
बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पेट्रोल में तय सीमा से अधिक इथेनॉल मिलाए जाने के आरोपों पर सोमवार को दस्तावेज और सबूत पेश करने का वादा किया है। शिवकुमार ने रविवार को आरोप लगाया कि राज्य के कुछ पेट्रोल पंपों पर बेचे जा रहे पेट्रोल में 31 प्रतिशत तक इथेनॉल मिला हुआ है। यह तय की गई ई-20 ब्लेंडिंग सीमा (20 प्रतिशत) से काफी अधिक है। मुख्यमंत्री ने ईंधन की गुणवत्ता, नियामक निगरानी और उपभोक्ता सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार इथेनॉल की अत्यधिक मिलावट की शिकायतों की जांच कर रही है और जल्द ही इसके नतीजे जनता के सामने रखेगी।
उन्होंने बताया कि 67 जगहों से पेट्रोल के नमूने लिए गए हैं और जांच का काम लगभग 30 प्रतिशत पूरा हो चुका है। सरकार को ऐसी शिकायतें मिली हैं कि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बहुत अधिक होने के कारण वाहनों में दिक्कतें आ रही हैं, जैसे बार-बार इंजन बंद होना और माइलेज कम हो जाना। मुख्यमंत्री ने कहा कि संबंधित मंत्री सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में जांच के नतीजे और उससे जुड़े दस्तावेज जारी करेंगे। यह विवाद तब शुरू हुआ जब राज्य सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने सात जिलों से पेट्रोल के नमूने लेकर उनकी जांच कराई। राज्य सरकार के अनुसार कुछ नमूनों में इथेनॉल की मात्रा 30 प्रतिशत से भी अधिक पाई गई। इनमें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के एक आउटलेट से लिया गया नमूना (31.2 प्रतिशत इथेनॉल) और ङ्क्षहदुस्तान पेट्रोलियम के आउटलेट से लिया गया नमूना (30.5 प्रतिशत इथेनॉल) शामिल हैं।
भारत पेट्रोलियम, नायरा एनर्जी और शेल के नमूनों में भी इथेनॉल की मात्रा तय सीमा (20 प्रतिशत) से अधिक पाई गई। इन आरोपों के कारण कर्नाटक सरकार का सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और केंद्र सरकार के साथ टकराव हो गया है। यह विवाद उपभोक्ताओं को बेचे जा रहे पेट्रोल में इथेनॉल की वास्तविक मात्रा को लेकर है। सार्वजनिक क्षेत्र की तीन तेल कंपनियों-इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और ङ्क्षहदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने कर्नाटक सरकार के नतीजों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नमूनों को इक_ा करने और उनकी जांच करने के तरीके पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नमूने लेने, उन्हें सुरक्षित रखने और उनकी जांच करने के लिए तय प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि देशभर में की गई गुणवत्ता निगरानी के दौरान 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 893 ई-20 नमूने लिए गए थे। इनमें इथेनॉल की मात्रा तय सीमा (19 से 21 प्रतिशत) के भीतर ही पाई गई। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इसी प्रक्रिया के तहत कर्नाटक में जांचे गए सभी 56 नमूने तय मानकों के अनुरूप थे। जांच के अलग-अलग नतीजों ने इस बात पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले पेट्रोल में इथेनॉल की असल मात्रा का पता लगाने के लिए एक स्वतंत्र और संयुक्त रूप से सत्यापित जांच प्रणाली की जरूरत है। शिवकुमार ने कहा कि यह मामला राजनीतिक मतभेदों से कहीं ऊपर है और इसका सीधा संबंध आम वाहन चालकों के हितों से है। उन्होंने कहा कि सरकार जवाबदेही तय करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए इस मामले को आगे बढ़ाएगी। पेश किए जाने वाले सबूत इस विवाद में आगे की कार्रवाई तय करने के लिहाज से काफी अहम साबित हो सकते हैं।

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