राज्य अप्रचलित कानूनों को निरस्त करें, राधाकृष्णन बोले- हमारी सबसे बड़ी ताकत विविधता में एकता
पुराने कानूनों की समीक्षा जरूरी
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने राज्यों से सुशासन और जीवनयापन में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए पुराने और अप्रासंगिक कानूनों की पहचान कर उन्हें संशोधित करने या निरस्त करने का आग्रह किया है। राधाकृष्णन ने गुरुवार को यहां भारतीय विधि आयोग की ओर से आयोजित ‘सहकारी संघवाद और विधिक सुधार : राष्ट्रीय एवं राज्य परिप्रेक्ष्य’ विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। संविधान केंद्र की शक्तियों, राज्यों की जिम्मेदारियों और उनकी वैध स्वायत्तता के बीच संतुलन स्थापित करने की रूपरेखा प्रदान करता है। भारतीय संघवाद की वास्तविक शक्ति विविधताओं का सम्मान करते हुए साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों की दिशा में मिलकर काम करने में निहित है।
पुराने कानून निरस्त करने से प्रशासन अधिक प्रभावी होगा
उन्होंने पिछले 12 वर्षों में औपनिवेशिक काल के तीन आपराधिक कानूनों को बदलने और 1,700 से अधिक अप्रचलित कानूनों को निरस्त किए जाने को भारतीय विधिक व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने राज्य विधि आयोगों से पुराने और अप्रासंगिक कानूनों की व्यवस्थित समीक्षा करने तथा आवश्यकतानुसार उनमें संशोधन या उन्हें निरस्त करने की सिफारिश करने का आह्वान किया।
केंद्र और राज्यों को समन्वय के साथ काम करना चाहिए
उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि विधिक सुधारों में सहकारी संघवाद का अर्थ हर मामले में एकरूपता स्थापित करना नहीं है। केंद्र और राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारियां जहां एक-दूसरे से जुड़ती हैं, वहां दोनों को समन्वय के साथ काम करना चाहिए। साथ ही, राज्यों की उन वैध स्वतंत्रताओं का संरक्षण भी जरूरी है, जिनके माध्यम से वे अपनी विशिष्ट जरूरतों के अनुरूप निर्णय ले सकते हैं।

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