हानि की तुलना में लाभदायी होगा जीएसटी सुधार

नवप्रवर्तन का प्रभाव 

हानि की तुलना में लाभदायी होगा जीएसटी सुधार
जीसटी परिषद ने सर्वसहमति से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी प्रणाली में नवीन उल्लेखनीय परिवर्तन किए हैं।

जीसटी परिषद ने सर्वसहमति से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी प्रणाली में नवीन उल्लेखनीय परिवर्तन किए हैं। इस अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के अंतर्गत अब अधिसंख्य विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं पर कर के क्रमश: 5 व 18 प्रतिशत के दो मूल्य संवर्ग बनाए गए हैं। पांच व अट्ठारह प्रतिशत का कर मूल्यांकन आगामी 22 सितंबर से आरंभ हो जाएगा। गत सप्ताह वर्ष 2025-2026 की अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत मूल्य वृद्धि के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था की समृद्ध उपलब्धि के बाद अब जीएसटी परिषद् ने भारतवर्ष के प्रमुख त्योहारी माह से पूर्व जीएसटी संबंधी अनेक जनहितैषी कर-नीतियां बनाकर देश की अर्थव्यवस्था का भविष्य सुरक्षित करने का प्रयास किया है। परिषद् के प्रमुख निर्णयों के अनुसार, अब व्यक्तिगत जीवन बीमा व स्वास्य बीमा पॉलिसी के प्रीमियम पर जीएसटी से छूट मिलेगी।

आपत्तियां प्रकट की थीं :

हालांकि तीन सितंबर की जीएसटी परिषद् की बैठक से पूर्व विपक्षी दलों के शासन वाले आठ राज्यों के वित्त मंत्रियों ने एक परस्पर भेंटवार्ता की थी, जिसमें उन्होंने संभावित 5 व 18 प्रतिशत की दो जीएसटी श्रेणियां बनाने तथा चली आ रही 12 व 28 प्रतिशत की कर श्रेणियां समाप्त करने के संबंध में आपत्तियां प्रकट की थीं। उनके अनुसार नवीन कर श्रेणीयन के कारण राज्यों को राजस्व हानि उठानी पड़ सकती है। किंतु जीएसटी परिषद् में विपक्षी शासन वाले राज्यों की आपत्तियों पर विमर्श के उपरांत केंद्र ने अहितकारी व विलासिता युक्त वस्तुओं एवं सेवाओं पर कर को 40 प्रतिशत करने का निर्णय लिया। कुछ राज्य तो नई कर श्रेणियों के लागू होने पर राजस्व हानि की क्षतिपूर्ति चाहते थे।

नए ढंग से क्रियान्वित :

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नवीन जीएसटी कर श्रेणियों पर राजनीतिक दृष्टि के साथ किंतु-परंतु नहीं होना चाहिए। इसकी तुलना में यह देखा-समझा जाना चाहिए कि जिस समय संपूर्ण विश्व में आर्थिक मंदी की उठापटक चल रही है, उसी अवधि में भारत की जीडीपी वृद्धि दहाई के प्रतिशत मूल्य की ओर बढ़ रही है। देश में जीएसटी संरचना के साकार होने एवं हर तिमाही में नए ढंग से क्रियान्वित होने के बाद जीडीपी में अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक ही वृद्धि होती रही है। नई कर श्रेणियों की घोषणा के बाद, इनके क्रियान्वयन से पूर्व केंद्रीय शासन को अग्रिम आकलन करते हुए संभावित अर्थहानियों का विचार सम्मुख रखना होगा। इस विचार की आवश्यकता इसलिए है, क्योंकि इस वर्षा ऋतु में जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश से लेकर उत्तराखण्ड तक के पर्वतों पर होती रही व हो रही अतिवृष्टिकारी वर्षा ने न केवल इन तीनों पर्वतीय प्रांतों, अपितु पंजाब, राजधानी दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान तथा अन्य प्रदेशों में भी विनाशक बाढ़ की परिस्थितियां उत्पन्न की हैं। अत: इन आठ-दस राज्यों के आपदाग्रस्त लाखों-करोड़ों लोगों के अनुसार तो आगामी त्योहारी समय में 5 व 8 प्रतिशत के कर-मूल्य द्वारा बाजारों में मांग एवं खपत बढ़ने की आशा नहीं की जानी चाहिए।

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नवप्रवर्तन का प्रभाव :

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जीएसटी कर-प्रणाली में हुआ नवप्रवर्तन का प्रभाव आगामी कुछ माह तक भारत के विभिन्न प्रांतों में पृथक-पृथक लाभ व हानि के अनुपात में होगा। लाभ-हानि की स्थितियां धीरे-धीरे ही दीर्घावधि में समग्र लाभ में परिणत होंगी। अधिक युवा जनसंख्या होने का लाभ भारत को हर स्थिति में मिलेगा। जीएसटी कर मूल्यों के दो संवर्ग बनाने का निर्णय भी युवा जनसंख्या की अतिसक्रियता को देखकर लाभकारी ही प्रतीत होता है। अर्थव्यवस्था के अनुरूप देश-दुनिया में देखें तो अनेक औद्योगिक, प्रौद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र हैं, जो लोगों की दैनिक इच्छाओं, विचारों, कार्यों व गतिविधियों के आधार पर बाजार की मांग व आपूर्ति निर्धारित करते हैं और ऐसे में जब अधिसंख्य घरेलू, सामान्य एवं दैनिक उपयोग की वस्तुओं के मूल्य में न्यून कर के कारण कमी होगी, तो निश्चित रूप में बाजार में उनकी मांग और बढ़ेगी, तो आपूर्ति के लिए उद्योगों, प्रौद्योगों तथा सेवा इकाइयों के उत्पादन-सृजन में वृद्धि होगी। अर्थव्यवस्था की उन्नति, समृद्धि तथा प्रगति के लिए यही चक्र तो चाहिए होता है।

आनेवाली वस्तुएं :

यह निश्चित है कि 5 और 18 प्रतिशत की कर-परिधि में आनेवाली वस्तुओं का बाजार अधि जनसंख्या के अनुपात में अति समृद्ध होगा। खाद्यान्न, दूध, कृषि, वस्त्र, आवास निर्माण, परिवहन, इत्यादि मूलभूत आवश्यकताओं वाले क्षेत्रों की वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य में कमी से बाजार में तेजी आएगी ही आएगी। राज्यों, लोकसेवकों,उद्योगों, बड़े, मझौले व छोटे व्यापारियों के लिए नई कर व्यवस्था का अनुपालन सुगम होगा। कर आकलन, मूल्यांकन, संग्रहण एवं अप्रत्याशित कराधान उलझनों के कारण उत्पन्न होनेवाले विवादों का समुचित निस्तारण हो सकेगा। इस स्थिति में शासन का पूर्वानुमानित राजकोषीय लाभ अत्यंत बढ़ जाता है। यदि पूर्वानुमान प्रत्येक तिमाही में शुद्ध लाभ के साथ सच होता है, तो भारत को विश्व की तृतीय सर्वाधिक विशाल अर्थव्यवस्था बनने में अधिक समय नहीं लगेगा। केंद्रीय शासन द्वारा जनहित की भावना को आगे रखकर किया गया जीएसटी का परिवर्तन, वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत की सृदृढ़ आर्थिक प्रगति का सबसे बड़ा आधार बनेगा। यह संभावना इसलिए क्षीण नहीं हो सकती है, क्योंकि शासन का संचालन पहले की अपेक्षा अत्यधिक निष्ठावान शासकों द्वारा किया जा रहा है।

-विकेश कुमार बडोला
यह लेखक के अपने विचार हैं।

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