फर्जी डिग्री से डॉक्टर बनने वाले 2 गिरफ्तार, 1 ने दिखाई कजाकिस्तान की फर्जी एमबीबीएस डिग्री 

दूसरे ने आठवीं पास होने के बावजूद गायनेकोलॉजी में डिप्लोमा के कागज लगाए

फर्जी डिग्री से डॉक्टर बनने वाले 2 गिरफ्तार, 1 ने दिखाई कजाकिस्तान की फर्जी एमबीबीएस डिग्री 
फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीयन कराने के लिए  एसओजी ने दो आरोपियों पंकज यादव (30) निवासी गांव कालियावास थोई खंडेला सीकर और नानजीराम चौधरी दहीपुर जालोर को गिरफ्तार किया।

जयपुर। फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीयन कराने के लिए  एसओजी ने दो आरोपियों पंकज यादव (30) निवासी गांव कालियावास थोई खंडेला सीकर और नानजीराम चौधरी दहीपुर जालोर को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी एमबीबीएस डिग्री और गायनेकोलॉजी एवं ऑब्स्टेट्रिक्स के डिप्लोमा के कूटरचित दस्तावेज आरएमसी में प्रस्तुत कर पंजीयन कराए थे। दोनों को न्यायालय में पेश कर पुलिस अभिरक्षा में भेज दिया है।

एफएमजी परीक्षा में असफल होने पर बनाई फर्जी डिग्री :

सूत्रों ने बताया कि राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरिधर गोपाल ने  6 अक्टूबर 2024 को जयपुर के अशोक नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। प्रारंभिक जांच में आठ लोगों के नाम सामने आए। बाद में नानजीराम चौधरी के खिलाफ भी रिपोर्ट दी गई। मामले की जांच एसओजी को सौंपी गई। जांच के अनुसार, पंकज यादव ने 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान में एमबीबीएस की पढ़ाई की थी, लेकिन एफएमजी में करीब छह बार असफल रहा। इसके बाद उसने बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज की फर्जी एमबीबीएस डिग्री और अंकतालिका तैयार करवाई। उसने बिहार मेडिकल काउंसिल का फर्जी पंजीयन प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया। सत्यापन में उसकी डिग्री और अंकतालिका फर्जी पाई गई। एसओजी ने उसे हरियाणा के कैथल से गिरफ्तार किया।

आठवीं पास होकर बना अस्पताल संचालक :

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दूसरे आरोपी नानजीराम चौधरी ने गायनेकोलॉजी एवं ऑब्स्टेट्रिक्स में डिप्लोमा (डीजीओ) के फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर पंजीयन कराया था। संबंधित संस्था द कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स, मुंबई से सत्यापन में डिप्लोमा प्रमाणपत्र, अलॉटमेंट लेटर, पासिंग और अटेम्प्ट सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। जांच में सामने आया कि नानजीराम केवल आठवीं तक पढ़ा है। वह रानीवाड़ा में भास्कर अस्पताल का संचालक है। वर्ष 2010 के आसपास उसने एक निजी चिकित्सक के क्लीनिक पर पर्चियां काटने का काम किया। वर्ष 2014 में राजदेव अस्पताल में ओपीडी काउंटर संभालने लगा। 2015 में अस्पताल खरीदने के बाद 2016 में उसका नाम बदलकर भास्कर अस्पताल कर दिया।

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 अधिकारियों की भूमिका की जांच :

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पुलिस के अनुसार, जांच में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित भूमिका भी खंगाली जा रही है। शुरुआत में नामजद आठ लोगों में शांतनु कुमार चारण, दीपक चौधरी, देवेंद्र नेहरा, गीता कुमारी, पंकज यादव, महेश कुमार गुर्जर, सरीमुल मजदूमदार और रामकिशोर महावर शामिल हैं।

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