रचना का एक्सटेंशन बन सकता है एआई, एक्सप्रेशन नहीं, प्रसून जोशी ने कहा- आविष्कार को जुगाड़ कहना हमारी सोच की सीमा है
कविता मंजिल नहीं, एक आंतरिक यात्रा
जयपुर। आविष्कार को जुगाड़ कहना बंद होना चाहिए, यह बात लेखक, गीतकार और रचनात्मक विचारक प्रसून जोशी ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पूरे आत्मविश्वास और गहराई के साथ कही। रविवार की सुबह फ्रंटलॉन में आयोजित सत्र इमेजिन: द न्यू हॉरिजन्स ऑफ क्रिएटिविटी में वे किश्वर देसाई के साथ संवाद में थे। यह बातचीत केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या रचनात्मकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि मनुष्य की असीम संभावनाओं, भाषा, मां, बचपन, संस्कृति और अनुभव के सत्य तक फैलती चली गई। प्रसून जोशी ने स्पष्ट कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में आर्टिफिशियल जैसा कुछ नहीं है। वहां जो भी है, वह मनुष्य द्वारा ही दिया गया डेटा है, मानव अनुभवों का संग्रह। एआई के पास वह है जो कहा जा चुका है, जबकि मनुष्य के पास वह भी है जो अभी कहा ही नहीं गया है।
कविता मंजिल नहीं, एक आंतरिक यात्रा : कविता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कविता किसी मंजिल का नाम नहीं, वह यात्रा है, लेकिन उसकी मंजिल रचनाकार के भीतर ही रहती है। किसी रचना का जितना महत्व होता है, उसका निर्माण-प्रक्रिया उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उस प्रक्रिया में जो आनंद, जो खुरदरापन है, वहीं रचना की आत्मा है।
भाषा मेरी हिंदी, लेकिन अंग्रेजी मेरा हुनर : जोशी ने कहा कि भाषा व्यक्ति के विश्वास और विचारों को झटका देती है। उन्होंने कहा कि भाषा तो एक ही होती है, वह आपकी मां होती है, जिससे आप नाराज भी हो सकते हैं और प्यार भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा, भाषा मेरी हिंदी है, लेकिन अंग्रेजी मेरा हुनर है। विज्ञापन की दुनिया में हिंदी को बोर्डरूम तक पहुंचाने पर उन्होंने कहा कि एक समय था जब सब बोलते थे और वे सिर्फ सुनते थे, आज वे बोलते हैं और सब सुनते हैं। एचएमटी हिंदी मीडियम टाइप कहे जाने के दर्द को भी उन्होंने साझा किया।

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