किसानों को बड़ी राहत : जैविक खेती प्रमाणीकरण शुल्क हुआ सस्ता, नई व्यवस्था लागू
यात्रा शुल्क सहित सभी प्रकार के प्रभार शामिल
जयपुर। राज्य सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों पर आर्थिक बोझ कम करने के उद्देश्य से जैविक खेती प्रमाणीकरण शुल्क में बड़ा संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत शुल्क प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे विशेष रूप से लघु एवं सीमांत किसानों को राहत मिलेगी। संशोधित व्यवस्था के अनुसार अब जैविक खेती का प्रमाणीकरण शुल्क 500 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। इस एकमुश्त शुल्क में निरीक्षण शुल्क, यात्रा शुल्क सहित सभी प्रकार के प्रभार शामिल होंगे।
इससे किसानों को अलग-अलग मदों में शुल्क नहीं देना पड़ेगा और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया भी अधिक सरल हो जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि नई शुल्क व्यवस्था से अधिक से अधिक किसान जैविक खेती की ओर आकर्षित होंगे। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों को जैविक उत्पादों के बेहतर बाजार और उचित मूल्य का लाभ भी मिल सकेगा। यह निर्णय राज्य में जैविक कृषि के विस्तार और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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